विमान बम षड्यंत्र में तीन दोषी

Image caption लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर खड़े विमान

लंदन की एक अदालत ने तीन ब्रिटिश मुस्लिम युवकों को अमरीका और कनाडा जा रहे विमानों को बम से उड़ाने का षड्यंत्र रचने के मामले में दोषी करार दिया है.

वुलविच क्राउन कोर्ट की जूरी ने अब्दुल्ला अली, 28 वर्ष, तनवीर हुसैन, 28 वर्ष और असद सरवर 29 वर्ष को पेय पदार्थों के रूप में बम रखने का षड्यंत्र करने के लिए दोषी ठहराया.

जबकि चार अन्य लोग इस मामले में निर्दोष साबित हुए हैं.

अगस्त 2006 में इन लोगों की गिरफ़्तारी के बाद हवाई अड्डों पर द्रव पदार्थों को ले जाने पर नए सिरे से पाबंदी लग गई जिससे यात्रियों को परेशानी का भी सामना करना पड़ा है.

जूरी को बताया गया कि अपनी गिरफ्तारी के समय षड्यंत्र के सरगना अहमद अली ने अमरीका और कनाडा के कुल सात हवाई जहाज़ों की पहचान की थी और ढाई घंटे के भीतर अटलांटिक महासागर के ऊपर उसकी इन जहाज़ों में विस्फोट करने की योजना थी

Image caption (बाएँ से) तनवीर हुसैन, अब्दुल्ला अहमद अली और असद सरवर को अदालत ने दोषी पाया है

इन जहाज़ों को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से उड़ान भरना था.

अहमद अली के सहयोगी सरवर ने बकिंघमशायर स्थित अपने घर में ही बारूद इकट्ठा करके बम बनाने का काम किया.

यहीं इन लोगों ने एक विशेष प्रकार का रासायनिक मिश्रण तैयार किया जिसे अपने सामान के साथ पेय पदार्थों के रूप में विमान में ले गए.

ये तीनों इससे पहले भी द्रव बम से हत्या का षड्यंत्र रचने के लिए दोषी पाए गए थे.

लेकिन तब जूरी ये तय नहीं कर सकी थी कि क्या वास्तव में इनकी योजना विमान में विस्फोट करे की थी.

लकिन दूसरी बार की सुनवाई में जूरी इस निष्कर्ष पर पहुंची कि ऐसा ही हुआ था.

खुफिया सूत्रों का मानना है कि इस षड्यंत्र के पीछे अल- क़ायदा का हाथ है.

हवा में ही हज़ारों लोगों की मौत का मतलब है कि अगर ऐसा हुआ होता तो इससे 11 सितंबर को अमरीका में हुए हमले से भी ज़्यादा तबाही मचती.

गृह सचिव एलन जॉनसन का कहना है कि इस षड्यंत्र की जांच ब्रिटेन के इतिहास का सबसे बड़ा आतंक- विरोधी अभियान था जिसे ऑपरेशन ओवर्ट कहा जाता है.

उन्होंने कहा, "इस मामले से स्पष्ट है कि हमें आतंकवाद से कितना गंभीर और वास्तविक ख़तरा है. ये बेहद विनाशकारी षड्यंत्र था जो बड़े पैमाने पर लोगों की मौत का कारण बन सकता था."

उन्होंने कहा कि इन लोगों को न्याय के कठघरे तक लाने में पुलिस और सुरक्षाबलों ने अहम भूमिका निभाई.

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