भारी बारिश और बाढ़ से उत्तर भारत प्रभावित

उत्तर भारत में बाढ़
Image caption उत्तर भारत के कुछ राज्यों में बाढ़ की स्थिति पहले से ही है

पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी बारिश के कारण उत्तर भारतीय राज्यों के कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं. उत्तर प्रदेश से पिछले दो दिनों की बारिश के दौरान 24 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

वहीं राजधानी दिल्ली में भी यमुना अपने खतरे के निशान के पास पहुँच गई हैं. राजधानी में इसे लेकर राज्य सरकार राहत कार्यक्रमों में जुट गई है और लोगों को चेतावनी जारी कर दी गई है.

उत्तर प्रदेश से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने बताया कि राज्य में इस सप्ताह बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई है. बाढ़ के कारण हालात बेकाबू होते जा रहे हैं.

राज्य के अधिकारियों का कहना है कि दो दिनों की घनघोर बरसात के कारण प्रदेश में 24 लोगों की मौत हो गई है. इस तरह राज्य में अबतक अतिवृष्टि और बाढ़ से मरने वालों की संख्या 220 पहुँच गई है.

पिछले दो दिनों में राजधानी लखनऊ और पड़ोस के कानपुर, बाराबंकी ज़िलों में सबसे ज़्यादा बारिश हुई. तेज हवाओं के साथ ज़ोरदार बारिश में तमाम पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए हैं.

कई जगह मकान और दीवारें गिर गई हैं. इस तरह के हादसों के कारण लोग मरे और घायल हुए हैं. शहरी इलाकों में जल निकासी की व्यवस्था ठीक न होने से घंटों जल भराव की समस्या रही. सीतापुर , हरदोई, लखनऊ और बाराबंकी में कच्चे घर गिरने से लोगों की मौत हुई.

उफ़ान पर नदियां

उत्तरांचल और नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में ज्यादा बारिश से यमुना, शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है. इसके अलावा बुंदेलखंड के बंद ज़िले में केन नदी का पानी बढ़ रहा है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल इस समय कहीं बाढ़ की स्थिति नहीं है.

फिर भी पश्चिम में यमुना के किनारे मुजफ्फरनगर और बागपत तथा बुंदेलखंड में बांदा में लोगों को संभावित बाढ़ से सतर्क कर दिया गया है.

राजधानी दिल्ली में भी पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश और हरियाणा से छोड़े गए पानी की वजह से यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है.

बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद ने बताया कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए सरकार ने चेतावनी जारी कर दी है.

बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता बीपीएस तोमर ने बीबीसी को बताया कि शुक्रवार दोपहर 12 बजे तक यमुना का जलस्तर 204.70 मीटर पहुंच गया है, जो ख़तरे के निशान से केवल 13 सेंटीमीटर नीचे है.

जलस्तर के लगातार बढ़ने की आशंका है क्योंकि हरियाणा से पानी छोड़ना जारी है.शनिवार सुबह नौ बजे 85,683 क्यूस़ेक पानी छोड़ा गया है.

ग़ौरतलब है कि हरियाणा के हथनी कुंड बांध से शुक्रवार की सुबह 4.20 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे यमुना के जलस्तर में वृद्धि हो गई और बाढ़ का ख़तरा मंडराने लगा है.

आशंका जताई जा रही है कि यमुना का जलस्तर शनिवार को ख़तरे के निशान यानी 204.83 मीटर को पार कर सकता है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ख़तरे के निशान और बाढ़ में काफ़ी फ़र्क है.

जबतक जलस्तर 206 मीटर नहीं पहुंचता इसे गंभीर स्थिति नहीं कहा जा सकता. बावजुद इसके बाढ़ की आशंका के मद्देनजर सभी विभागों को चेतावनी जारी कर दी गई है.

राजधानी में तैयारी

बाढ़ नियंत्रण विभाग के मुख्य अभियंता बीपीएस तोमर ने कहा कि यमुना का पानी शहर में ना घुसे इसके लिए उनका विभाग पूरी तरह तैयार है. पानी को नियंत्रित करने के लिए कई जगह रेगुलेटर बंद कर दिए गए हैं और पंम्पिंग जारी है.

बाढ़ नियंत्रण विभाग के सूचना अधिकारी विनोद गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि स्थिति से निपटने के लिए एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है.

इसके अलावा यमुना के समीपवर्ती निचले इलाकों को ख़ाली कराए जाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

दिल्ली में चिल्ला,गढ़ी मांडू, ककरौला, बटला हाउस, जैतपुर, क़ुदसिया घाट जैसे इलाक़ों में बाढ़ के संभावित ख़तरे से निपटने के लिए लोगों को वहां से हटाकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है.

विनोद गुप्ता ने बताया कि कई जगहों पर टेंट लगाए गए हैं. 40 से ज़्यादा नावों को तैयार रखा गया है. 10 से अधिक गोताख़ोर भी उपलब्ध हैं. 10 हज़ार रेत की बोरियां,10 स्टोन कटर, ड्रेगन लाइट वग़ैरह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए उपलब्ध हैं.

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