बगराम के क़ैदियों को राहत की उम्मीद

  • 13 सितंबर 2009
बगराम
Image caption अफ़ग़निस्तान के बगराम स्थित 'हिरासत केंद्र' में 600 युद्धबंदियों को रखा गया है

राष्ट्रपति बराक ओबामा का प्रशासन अफ़ग़ानिस्तान स्थित अमरीकी 'हिरासत केंद्र' के युद्धबंदियों के लिए एक ऐसा दिशा निर्देश जारी करने की योजना बना रहा है जिसके तहत क़ैदी अपनी हिरासत को चुनाती दे सकेंगे.

नए दिशा निर्देश से 600 क़ैदियों को राहत मिलेगी और वे पहली बार अपने बचाव में गवाह बुलाने के साथ सबूत पेश कर सकेंगे.

ये ख़बरें द वॉशिंगटन पॉस्ट और न्यूयॉर्क टाइम्स में शनिवार के वेब संस्करण में प्रकाशित हुई हैं.

ग़ौरतलब है कि क़ैदियों को आफ़ग़ानिस्तान के परवान प्रांत में बगराम सैन्य एयरपोर्ट पर स्थित एक हिरासत केंद्र में रखा गया है.

ये दिशा निर्देश तब सामने आए हैं जब ओबामा प्रशासन बुश प्रशासन के दौरान हिरासत नीतियों की समीक्षा कर रही है और यह तय कर रही हैं कि कहाँ बदलाव किए जाएं.

ये प्रस्तावित दिशा निर्देश जुलाई के मध्य में समीक्षा के लिए अमरीकी कांग्रेस को भेजे गए थे और माना जा रहा है कि इस हफ़्ते सार्वजनिक कर दिया जाएगा.

चुनौती देने का अधिकार

नियम के तहत जो क़ैदी अपने हिरासत को चुनौती देंगे उन्हें अमरीकी प्रतिनिधि मुहैया कराया जाएगा, जो सबूत जमा करेंगे और गवाह भी बुलाएंगे. यही प्रक्रिया क्यूबा स्थित ग्वांतानामों बे के युद्धबंदियों के लिए अपनाई जाती है.

बगराम के क़ैदियों को अपनी हिरासत को चुनौती देने का अधिकार अब तक नहीं मिला है.

अमरीकी सैन्य और मानवाधिकार अधिकारियों के अनुसार जुलाई से बगराम के क़ैदी कम क़ानूनी अधिकारों के कारण अंतरराष्ट्रीय समिति के ज़रिए मिल रहे मनोरंजन और परिवार वालों से मिलने की सुविधाओं का बहिष्कार कर रहे हैं.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की दलील है कि बगराम के क़ैदियों को भी वही अधिकार दिए जाएं जो ग्वांतानामों बे के क़ैदियों को दिए गए हैं. लेकिन अमरीकी सेना का कहना है कि बगराम के क़ैदियों का मामला अलग है क्योंकि इन्हें सीधे युद्ध क्षेत्र से पकड़ा गया है.

अमरीका में अप्रैल में एक संघीय जज ने व्यवस्था दी थी कि बगराम के अनेक क़ैदियों को अपनी हिरासत को चुनौती देने का अधिकार है. हालाँकि उसके बाद ओबामा प्रशासन ने संघीय अदालत से अपने फ़ैसले को पलटने की अपील की थी.

बगराम क़ैदियों के वकील रमज़ी कासिम का कहना है कि ओबामा प्रशासन की पूरी कोशिश है कि कैसे न्यायिक व्यवस्था की आँख में धूल झोंका जा सके.

रमज़ी कासिम के अनुसार दिशा निर्देश जल्द नहीं आने वाले हैं क्योंकि वास्तविक समीक्षा के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त विकल्प हैं.

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