ज़हरीली शराब के मामले पर होगी जांच

मायावती
Image caption मायावती ने ज़हरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये.

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने ज़हरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच के आदेश दे दिए हैं.

सहारनपुर ज़िले के कई गांवों में लगभग 30 लोग ज़हरीली शराब पीने से मारे गए हैं. स्थानीय पुलिस ने शराब के अवैध व्यापार से जुड़े होने के संदेह 34 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

उत्तर प्रदेश के प्रशासन ने सहारनपुर ज़िले के आबकारी अधिकारी एसपी सिंह और निचले दर्जे के बारह अन्य पुलिस और आबकारी अधिकारियों को निलम्बित कर दिया है.

एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि आबकारी और पुलिस अधिकारियों को ज़हरीली शराब के अवैध व्यापार में कथित लापरवाही बरतने और देखी अनदेखी करने के कारण निलम्बित किया गया है.

जांच के आदेश

मुख्यमंत्री मायावती ने 6 सितम्बर से लेकर 13 सितम्बर के बीच ज़हरीली शराब पीने से हुई मौतों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिये हैं.

मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों को मुआवज़ा देने के आदेश भी दिए.

लेकिन विपक्ष सरकार के इस क़दम से संतुष्ट नहीं है. समाजवादी पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव ने आबकारी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी के इस्तीफ़े की मांग की है. सिद्दीक़ी को मायावती का क़रीबी समझा जाता है.

विपक्ष के नेता ने कहा कि इन लोगों की मौत इसलिए हुई क्योंकि राज्य सरकार की शराब नीति दोषपूर्ण है जिसमें एक विशेष शराब माफ़िया को प्रश्रय दिया जाता है.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि ऐसा अवैध व्यापार पुलिस और आबकारी अधिकारियों की मिली भगत के बिना नहीं चल सकता.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस अवैध व्यापार के एक प्रमुख व्यक्ति मुकेश त्यागी को गिरफ़्तार कर लिया गया है लेकिन उसके बहुत से साथी फ़रार हैं.

शराब से आय

भारत में सरकार को शराब की बिक्री से भारी आय होती है. शराब का लाइसेन्स बड़ा महंगा होता है और उसे प्रशासन के संरक्षण की ज़रूरत पड़ती है. लाइसेन्स वाली दूकानों पर बिकने वाली शराब महंगी होती है.

अधिकतर निर्धन लोग यह महंगी शराब नहीं ख़रीद पाते. इस वजह से ज़हरीली शराब का अवैध व्यापार साथ साथ चलता है. ऐसी शराब बनाने वाले शराब में उद्योगों में इस्तेमाल किए जाने वाला अल्कोहल और संशोधित स्पिरिट मिला देते हैं.

इस ज़हरीली शराब को पीने से हर साल बहुत लोग मारे जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के आबकारी आयुक्त सुधीर एम बोवाडे ने बताया, "अवैध शराब बरामद करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई हो रही है. अब तक 1400 लीटर अवैध शराब बरामद हो चुकी है". लेकिन जब तक आबकारी नीति में सुधार नहीं किया जाता और शीर्ष स्तर पर भ्रष्टाचार नहीं रुकता तब तक ज़हरीली शराब का अवैध व्यापार बंद करना संभव नहीं.

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