'पाक ज़िम्मेदारी से पेश आ रहा है'

मुशर्रफ़
Image caption परवेज़ मुशर्रफ़ की इंटरव्यू से विवाद खड़ा हो गया है

पाकिस्तान ने पूर्व राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के अमरीका से मिलने वाले हथियारों के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि पाकिस्तान की निर्वाचित सरकार अपने सभी पड़ोसियों के साथ बहुत ही ज़िम्मेदारी से पेश आ रही है.

इससे पहले परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा था कि उनके कार्यकाल के दौरान पाकिस्तान फ़ौज के जिस भी यूनिट को अमरीका से मदद के तहत जो हथियार मिलते थे वे उसी के पास रहते थे फिर वह यूनिट चाहे पश्चिमी सरहद पर तैनात हो या फिर पूर्वी सरहद (यानी भारत के साथ सीमा) पर.

भारत ने इस पर आपत्ति जताई थी और अमरीका ने इस पर कहा है कि वो अपने 'हथियारों के ग़लत इस्तेमाल के हर आरोप को बेहद गंभीरता से लेता है लेकिन फ़िलहाल उसे इस बारे में और जानकारी की ज़रूरत है.'

बीबीसी संवाददाता जाफ़र रिज़वी के साथ बातचीत में लंदन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शम्सुल हसन ने कहा, "ये परवेज मुशर्रफ़ की पाकिस्तान में लोगों को अपनी ओर करने की उनकी कोशिश है. पाकिस्तान की निर्वाचित सरकार अपने सभी पड़ोसियों के साथ बहुत ही ज़िम्मेदारी से पेश आ रही है. जो सहायता या हथियार हमें पश्चिमी देशों से और अन्य देशों से मिल रहे हैं वो हम आतंकवाद से लड़ने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं."

'पाकिस्तान को नुक़सान होगा'

शम्सुल हसन ने बीबीसी से कहा, "मुशर्रफ़ साहब की बातों से केवल उन लोगों को ख़ुशी होगी जो पाकिस्तान की छवि को नुक़सान पहुँचाना चाहते हैं. उन्हें एक पूर्व राष्ट्रपति होने के नाते ऐसी हिमाकत की बातें नहीं करनी चाहिए. जब पाकिस्तान एक जंग में लगा हुआ है, जेहाद कर रहा है आतंकवादियों के ख़िलाफ़....उस समय उन्हें और ज़िम्मेदार होना चाहिए."

उनका कहना था, "जिस तरह की वे बातें कर रहे हैं उससे पाकिस्तान को नुक़सान ही होगा, फ़ायदा नहीं होगा. हमने अपने दोस्तों से जंग में इस्तेमाल होने वाली सामग्री माँगी है लेकिन यदि मुशर्रफ़ साहब ऐसी बातें करते रहे तो कौन हमें मदद देगा."

उधर पाकिस्तान के सामिरक मामलों की जानकार आयिशा सिद्दीका का कहना है, "आप उनका बयान देंखे तो यह एक सेवानिवृत्त जनरल का बयान है जो ये बताना चाह रहे हैं कि उन्होंने जो किया देश की बेहतरी के लिए किया. दूसरा ये कि वे कभी अमरीका के दबाव में नहीं थे. तीसरा यह कि वे अपने फ़ैसले स्वतंत्र तौर पर करते थे. जो उन्होंने बात कही है वह 'कॉमन सेंस' है कि जिस यूनिट के पास जो हथियार होते हैं वो यूनिट कभी कहीं तैनात होता है तो कभी कहीं...ये रिटार्यर्ड जनरल का बयान है. भारत की प्रतिक्रिया ओवर-रिएक्शन है. ये सभी को पता है कि हमारे यहाँ जनरल जब रिटार्य हो जाते हैं तो वे चुप नहीं बैठते..."

परेवज़ मुशर्रफ़ ने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा है कि पाकिस्तान को तालिबान से लड़ने के लिए अमरीका से जो फ़ौजी मदद मिलती थी वह फ़ौज के यूनिट के पास चली जाती है फिर वह पश्चिमी या पूर्वी, किसी भी सरहद पर तैनात हो सकती है.

अमरीका की प्रतिक्रिया

इसी से जुड़े एक सवाल के जवाब में अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इएन केली ने कहा है कि ऐसे आरोपों को अमरीका बेहद गंभीरता से लेता है. इएन केली ने कहा है कि जब भी अमरीका किसी को हथियार बेचता है या फ़ौजी मदद देता है तो उनके इस्तेमाल के साथ शर्तें जुड़ी होती हैं.

उनका कहना था,"मुशर्रफ़ ने इस बारे में बहुत कम जानकारी दी है. लेकिन हम उस हर आरोप को बेहद गंभीरता से लेते हैं जिसमें कहा गया हो कि अमरीकी हथियारों का इस्तेमाल तयशुदा मक़सद के लिए नहीं हुआ."

उनसे यह भी पूछा गया कि जब पाकिस्तान को हथियार दिए गए थे तो क्या उसमें ऐसी शर्त थी कि उन्हें भारत के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं किया जाएगा?

इस सवाल के जवाब में प्रवक्ता का कहना था, "मुझे मुशर्रफ़ के बयान की विस्तृत जानकारी तो नहीं है लेकिन मैं समझता हूं कि वो उस फ़ौजी मदद की बात कर रहे थे जो पाकिस्तानी चरमपंथियों से लड़ने के लिए की गई थी."

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