'मुझे लोहे की सरियों से मारा'

पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर जूता फेंकने वाले इराक़ी पत्रकार ने कहा है कि जेल में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने उन्हें प्रताड़ित किया था.

पिछले साल जूता फेंकने के आरोप में उन्हें तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी और वे मंगलवार को ही रिहा किए गए हैं.

मुंतज़र की साफ़-सुथरी छवि को देखते हुए उनकी सज़ा की अवधि घटाकर एक साल कर दी गई थी. अच्छे बर्ताव के कारण उन्हें तीन महीने पहले ही छोड़ दिया गया.

बग़दाद जेल से रिहा होने के कुछ देर बाद मुंतज़र अल ज़ैदी ने कहा है कि वे चाहते हैं कि अधिकारी उनसे माफ़ी मांगें. उन्होंने कहा कि वे नाम बाद में बताएँगे.

रिहा होने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा, “आज मैं फिर से आज़ाद हूँ पर मेरा वतन आज भी क़ैद में है. जेल में मेरी पिटाई की गई, चाबुक मारे गए, बिजली के झटके दिए गए. जिस समय इराक़ी प्रधानमंत्री टीवी पर बोल रहे थे कि जब तक मेरी सलामती के बारे में उन्हें आश्वासन नहीं मिलता वे ठीक से सो नहीं पाएँगे, ठीक उसी समय मुझे प्रताड़ित किया जा रहा था, लोहे की सरियों से मारा जा रहा था.”

मुंतज़र ने कहा कि वे इराक़ी प्रधानमंत्री से भी माफ़ी चाहते हैं.

रॉयटर्स के मुताबिक वे पत्रकार वार्ता में ठीक से बोल नहीं पा रहे थे क्योंकि उनका एक दाँत नहीं था.

मुंतज़र के भाई ने पत्रकारों से कहा, “जब भी बुश अपने जीवन का नया पन्ना पलटेंगे, मुतंज़र का जूता उनका इतंज़ार कर रहा होगा.”

उन्होंने कहा कि मुंतज़र की जान को खतरा है और वे मेडिकल जाँच के लिए ग्रीस जाएँगे.

Image caption दोनों जूते राष्ट्रपति बुश को नहीं लगे थे

बुश पर जूता

मुंतज़र ज़ैदी ने विरोधस्वरूप जॉर्ज बुश पर एक पत्रकार वार्ता में जूता फेंका था जिसके बाद अरब जगत में उन्हें हीरो जैसा रुतबा हासिल हो गया था.

उनके रिश्तेदारों का दावा है कि क़तर के अमीर ने उन्हें सोने का घोड़ा देने की पेशकश भी की थी.

रिहाई की खुशी में उनका परिवार जश्न की तैयारी कर रहा है. उन्हें अरब जगत से कई जगह से नौकरी, पैसे और शादी के प्रस्ताव मिल चुके हैं.

मुंतज़र के भाई ज़रग़ाम भी कहते रहे हैं कि जेल में मुंतज़र की पिटाई की गई और और उनका बाजू टूट गया था. लेकिन इराक़ी सेना इन आरोपों का खंडन कर रही है.

मुंतज़र काहिरा के अल-बग़दादिया टीवी के लिए काम करते थे.

दिसंबर, 2008 में एक पत्रकार वार्ता में मुंतज़र ने जॉर्ज बुश पर जूता फेंका था. जूता फेंकते हुए उन्होंने कहा था, “ये इराक़ी लोगों की तरफ़ से आख़िरी सलाम है. ये यतीम बच्चों, विधवाओं और इराक़ में मारे गए लोगों की तरफ़ से है.”

राष्ट्रपति पद छोड़ने से पहले ये बुश आख़िरी इराक़ा दौरा था.

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