नए डॉक्टर गाँवों में काम करें वरना...

  • 16 सितंबर 2009
डॉक्टर ग्रामीण इलाक़ों में काम करने के लिए कम ही इच्छुक रहते हैं
Image caption डॉक्टर ग्रामीण इलाक़ों में काम करने के लिए कम ही इच्छुक रहते हैं

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में सरकार ने राज्य के लगभग 700 डॉक्टरों को एक साल के लिए ग्रामीण इलाक़ों में काम करने का आदेश दिया है और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ेगा.

इस आदेश के साथ नियुक्ति पत्र बुधवार को इन डॉक्टरों को सौंपे गए हैं.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि भविष्य में इसी तरह के आदेश कुछ अन्य स्नातक डॉक्टरों को भी दिए जाएंगे. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि चिकित्सा स्नातकों को स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए सरकार तभी इजाज़त देगी जब वे एक साल तक ग्रामीण इलाक़ों में काम कर लेंगे.

हेमंत बिस्व सरमा ने कहा कि सरकार के इस क़दम से ग्रामीण इलाक़ों में स्वास्थ्य सेवाओं में आमूल-चूल परिवर्तन लाने में मदद मिलेगी जहाँ सैकड़ों लोग मलेरिया और अन्य तरह की बीमारियों की वजह से जान गँवा देते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कोई डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्र में एक वर्ष तक काम करने की यह शर्त नहीं मानता है तो उसे स्नातकोत्तर यानी पोस्टग्रेजुएट शिक्षा हासिल करने के लिए सात लाख रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "नियुक्त पर उन्हें पहले एक वर्ष तक ग्रामीण इलाक़ों में सेवा करनी होगी. कम से कम इतना तो इन डॉक्टरों को राज्य के लोगों और सरकार के लिए करना ही होगा क्योंकि सरकार इन डॉक्टरों की शिक्षा पर भारी-भरकम रक़म ख़र्च करती है."

महाराष्ट्र ने भी डॉक्टरों को ग्रामीण इलाक़ों में काम कराने की योजना पर अमल कराने की कोशिश की थी लेकिन वहाँ यह क़दम कामयाब नहीं हुआ.

'इरादा पक्का है' असम के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "भले ही यह योजना महाराष्ट्र में कामयाब नहीं हुई हो लेकिन असम में अब यह ज़रूर कामयाब होगी क्योंकि इन डॉक्टरों की नियुक्ति इसी शर्त के साथ की गई है के वे पहले एक वर्ष तक ग्रामीण इलाक़ों में काम करेंगे. ये डॉक्टर या तो ये शर्त स्वीकार करेंगे या फिर उन्हें सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी."

उन्होंने कहा कि असम सरकार रिटायर डॉक्टरों को भी इसी तरह की शर्तों पर ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के लिए नियुक्तियाँ कर रही है. स्वास्थ्य हेमंत बिस्व सरमा ने कहा, "जिसने चिकिस्ता डिग्री हासिल की है वो बिना किसी औपचारिकता के इंटरव्यू देने के लिए आ सकता है और उसे नौकरी मिल जाएगी. पूरे प्रदेश में अब भी 234 डॉक्टरों के रिक्त पद हैं और इन सभी पदों पर ग्रामीण इलाक़ों में स्थित स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की नियुक्तियाँ की जाएंगी."

मंत्री ने कहा कि फिर से भर्ती किए जाने वाले रिटायर डॉक्टरों को ग्रामीण इलाक़ों में काम करने के लिए 15 हज़ार रुपए मासिक का वेतन दिया जाएगा, इसके अलावा उन्हें पेंशन सुविधाएँ भी दी जाएंगी.

अनेक अन्य राज्यों की ही तरह असम के ग्रामीण इलाक़ों में भी स्वास्थ्य सेवा तहस-नहस नज़र आती है क्योंकि वहाँ डॉक्टर काम करने के लिए कम ही तैयार होते हैं इसलिए सरकार के सामने ग्रामीण इलाक़ों में स्वास्थ्य सेवा को सुधारने की एक बड़ी चुनौती है. उन्होंने कहा, "प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएँ सुधारने के लिए क्रांतिकारी क़दम उठाना सरकारी के लिए बेहद ज़रूरी है और ख़ासतौर से ग्रामीण इलाक़ों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है.."

ग्रामीण इलाक़ों में डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सों और अन्य चिकिस्ताकर्मियों की भारी कमी है, "लगभग 1200 नर्सों की ज़रूरत है और इन पदों पर अगले दो महीनों के भीतर भर्ती की जानी है. नर्सों की भारी कमी होने की वजह से पिछले कुछ वर्षों के दौरान टीकाकरण कार्यक्रमों पर भी बहुत ज़्यादा असर पड़ा है. "

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बहुत से सरकारी डॉक्टर अपनी सामान्य ड्यूटी पूरी नहीं करते हैं और अक्सर वे अपने निजी क्लीनिकों में काम करते हैं, और ऐसी गतिविधियों को अब सरकार बिल्कुल भी सहन नहीं करेगी.

उन्होंने कहा, "मैंने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज का हाल ही में दौरा किया है और मुझे यह देखकर बहुत निराशा हुई कि बहुत से डॉक्टर कॉलेज से नदारद थे."