यूपी सरकार के जवाब से कोर्ट नाखुश

  • 18 सितंबर 2009
Image caption उत्तर प्रदेश में स्मारकों और पार्कों के निर्माण के ख़िलाफ़ कोर्ट में कई याचिकाएं दी गई हैं

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश के बावजूद लखनऊ में स्मारकों और पार्कों का काम जारी रहने के संदर्भ में मायावती सरकार के जवाब पर असंतोष जताया है.

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार से संबंधित इस मामले की शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.

याचिकाकर्ता के वकील सीबी सिंह ने बीबीसी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वयं संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद स्मारकों में निर्माण कार्य जारी है.

राज्य सरकार की ओर से हालांकि इस मामले में सफाई दी गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट उनके जवाब से संतुष्ट नहीं था.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही पक्षों को 29 सितंबर तक जवाब दाख़िल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए पाँच अक्टूबर की तारीख़ तय की गई है.

सीबी सिंह के मुताबिक शुक्रवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने ये स्वीकार किया कि स्मारकों पर काम रोकने के आदेश के बाद भी काम चल रहा था लेकिन साथ ही कहा है कि वहां निर्माण कार्य नहीं बल्कि मरम्मत का काम हो रहा था.

राज्य सरकार ने अपने जवाब में ये भी कहा कि जिन जगहों पर मरम्मत का काम हो रहा था वो रिट याचिका में शामिल नहीं थीं.

लेकिन अदालत राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी. कोर्ट ने सवाल किया कि सरकारी खजाने से इतनी बड़ी धनराशि पार्कों और स्मारकों पर खर्च करना कहां तक उचित है, भले ही इसके लिए विधानसभा या कैबिनेट ने मंजूरी दी हो.

कोर्ट ने यह भी कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए. उत्तर प्रदेश में सरकारी ख़र्चे से बन रहे स्मारकों और मूर्तियों के निर्माण को रोकने के लिए कोर्ट में कई याचिकाएं दी गई हैं.

इस मामले पर राज्य सरकार की काफी आलोचना भी हुई है.

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