भारत कश्मीर मसले पर आगे आएः गिलानी

  • 20 सितंबर 2009
Image caption यूसूफ गिलानी ने फिर कश्मीर मुद्दा उछाला

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि भारत लगातार कश्मीर मुद्दे पर बातचीत के पाकिस्तान के प्रस्ताव को नज़रअंदाज़ करता रहा है. उन्होंने कहा है कि कश्मीर मसले का शांतिपूर्ण हल से ही इस क्षेत्र में शांति स्थापित की जा सकती है.

यूं तो पाकिस्तान ने कश्मीर को लेकर कोई नई बात शायद नहीं कही है, पर जिस समय ये बात कही गई है उस पर सवाल उठ रहे हैं.

मुंबई हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत का सिलसिला थमा हुआ है और इस बातचीत को फिर से शुरु करने की भूमिका बनाने की दिशा मे अगले सप्ताह दोनों देशों के विदेश सचिवों और मंत्रियों की मुलाक़ात होनी है.

वार्ताओं से उम्मीद कम लेकिन...

हाल ही में पाकिस्तान की तरफ से मुंबई हमलों से जुड़े संदिग्धों के ख़िलाफ कार्रवाई के संकेतों से जानकार मान रहे थे कि पाकिस्तान बातचीत की ज़मीन तैयार करने की कोशिश में है.

पर अब प्रधानमंत्री गिलानी ने अपने घर पर कश्मीरी नेताओं के लिए आयोजित इफ़्तार पार्टी में कहा "हम कश्मीर मुद्दे को शांतिपूर्ण तरीक़े से सुलझाना चाहते हैं और इस मु्द्दे पर भारत को बातचीत का न्यौता देते हैं, जिस न्यौते को भारत लंबे समय से नज़रअंदाज़ करता रहा है."

गिलानी ने इस मुद्दे पर और बोलते हुए कहा की जब जुलाई महीने में शर्म अल शेख में वो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले थे तो उन्होंने ये मुद्दा उठाया था और कहा था की कश्मीर मुद्दे को कश्मीरियों की आकांक्षाओं के अनुरुप सुलझाए बिना इस क्षेत्र में शांति स्थापित करना संभव नहीं है.

उन्होंने दावा किया की अतंरराष्ट्रीय जगत भी उनकी इस राय से इत्तेफ़ाक रखता है.

रास्ता तो खुले

जवाहरलाल नहरु विश्वविद्यालय में प्रोफेसर चमनलाल भारत पाकिस्तान के बीच हर हाल मे बातचीत के पक्षधर हैं.

वो कहते हैं की दोनों देशों के बीच घरेलू राजनीतिक कारणों से बयानबाज़ी होती रहती है, जिससे बातचीत का माहौल ख़राब होता है. काफी हद तक मीडिया भी माहौल ख़राब करता है. पर दोनों देशों के लिए बातचीत के अलावा कोई और विकल्प है नहीं.

प्रोफेसर चमनलाल कहते हैं कि मुंबई जैसी बड़ी घटना के बाद भी दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहना चाहिए, क्योंकि आपको भविष्य की तरफ देखना होगा.

उधर पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने बीबीसी से बातचीत में कहा है, "हमारे पास हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ कोई पुख़्ता सबूत नहीं हैं जिससे ये कह सकें कि हाफ़िज़ सईद मुंबई हमलों में शामिल थे. इसलिए उनको इस आरोप में ग़िरफ्तार नहीं किया जा सकता" लेकिन उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान हाफ़िज़ सईद को छोड़ेगा नहीं.

इसके अलावा शनिवार को इस्लामाबाद की एक आतंकवाद निरोधक अदालत ने मुंबई बम हमलों के सात संदिग्धों के ख़िलाफ़ चल रहे मामले को 26 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

कुल मिलाकर मुंबई हमलों से जुड़ी जांच पर जहां पाकिस्तान ने एक तरफ भारत को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि वो इस मामले में गंभीर है, वहीं कुछ बयान ऐसे भी आए हैं जिनसे भारत को ये कहने का मौक़ा मिल सकता है कि पाकिस्तान अभी भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रहा है.

ऐसे में इतना माहौल तो बनता नज़र आता है कि दोनों देशों के विदेश सचिव और विदेश मंत्री अगले सप्ताह मुलाक़ात कर बातचीत के सिलसिले की ज़मीन तैयार कर दें, चाहे दोनों देशों के बीच कम्पॉज़िट डायलॉग यानी समग्र बातचीत शुरू करने पर मौजूदा माहौल मे कोई सहमति न बन पाए.

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