'अमरीका अकेले नहीं निपट सकता'

ओबामा
Image caption राष्ट्रपति ओबामा पहली बार संयुक्त राष्ट्र को संबोधित कर रहे हैं.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि दुनिया के सामने इस समय कई चुनौतियां हैं लेकिन अमरीका अकेला उनसे नहीं निपट सकता.

महासभा को पहली बार संबोधित करते हुए उन्होंने चार चुनौतियों की चर्चा की. परमाणु प्रसार, शांति और सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और दुनिया की अर्थव्यवस्था.

उन्होंने सार्वभौमिक विकास और वैश्विक मूल्यों के प्रति अमरीका की वचनबद्धता दोहराई और दूसरे देशों को भी यही सब करने की चुनौती देते हुए कहा, “मैं यह संदेश लेकर लंदन से अंकारा, पोर्ट ऑप स्पेन से मॉस्को, अकरा से क़ाहिरा गया हूं. और उसी की चर्चा मैं यहां करूंगा. क्योंकि अब दुनिया के लिए एक नई दिशा में आगे बढ़ने का समय आ गया है. हमें एक दूसरे के हितों को ध्यान में रखते हुए और एक दूसरे का सम्मान करते हुए आगे बढ़ने के नए युग को गले लगाना है. यह काम अभी शुरु हो जाना चाहिए”.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि दुनिया के सामने जो चुनौतियां हैं उनसे निपटने का दायित्व केवल अमरीका का नहीं है. जो अमरीका पर ये आरोप लगाते रहे हैं कि अमरीका अकेले निर्णय करता है अब वो एक तरफ़ खड़े होकर इस बात का इंतज़ार नहीं कर सकते कि अमरीका अकेला दुनिया की समस्याएं सुलझाए.

राष्ट्रपति ओबामा ने मध्यपूर्व समस्या के शांतिपूर्ण हल की चर्चा करते हुए कहा कि वार्ताएं बिना किसी शर्त के तुरन्त शुरु होनी चाहिए. उन्होने कहा कि इसके लिए अमरीका को कुछ अलग पहल करनी होगी.

ओबामा ने कहा, “ केवल इसराइलियों और फ़लस्तीनियों को ही नहीं हम सबको यह तय करना है कि हम शांति के बारे में कितने गंभीर हैं. पुराने तरीके छोड़कर असुरक्षा और निराशा के चक्र को तोड़ कर हम सबको सार्वजनिक रूप से कहना चाहिए जो हम निजी तौर पर स्वीकार करते हैं. जब अमरीका इसराइल की सुरक्षा को लेकर अपनी वचनबद्धता के साथ साथ उसपर यह दबाव नहीं डालता कि उसे भी फ़लस्तीनियों के वैध दावों और अधिकारों का आदर करना चाहिए तो अमरीका इसराइल के साथ न्याय नहीं करता”.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि अमरीका ने जलवायु परिवर्तन को लेकर अमरीका के रवैय्ये में बदलाव आया है. अब तक अमरीका ने इसपर क़दम उठाने में ढिलाई बरती है लेकिन अब एक नए युग की शुरुआत हुई है. अमरीका पृथ्वी के बढ़ते तापमान की समस्या से निपटने के लिए क़दम उठा रहा है.

राष्ट्रपति ओबामा ने कहा, “जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए हमने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में 80 अरब डॉलर का निवेश किया है. हमने ईंधन की कार्यकुशलता के मापदंड बढ़ाए हैं. हमने संरक्षण के लिए नए प्रोत्साहन मुहैया किए हैं. हम जलवायु परिवर्तन पर हो रही अन्तर्राष्ट्रीय वार्ताओं में आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे हैं.”

‘एकजुट होकर काम करें’

ओबामा ने न केवल पिघलते हिम शिखरों पर चिंता जताई बल्कि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने की भी चर्चा की.

उन्होने कहा, “अगर ईरान और उत्तर कोरिया अंतर्राष्ट्रीय मानकों की उपेक्षा करेंगे, अगर वो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा से अधिक परमाणु हथियारों को महत्व देंगे, अगर वो पूर्वी एशिया और मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों की दौड़ के ख़तरों से अनभिज्ञ हैं तो उन्हे जवाबदेही करनी होगी”.

राष्ट्रपति ओबामा से पहले संयुक्त राष्ट्र की महासभा का उद्घाटन करते हुए महासचिव बान की मून ने कहा था कि दुनिया पर एक साथ कई संकट आ पड़े हैं, खाद्य संकट, ऊर्जा संकट, मंदी और स्वाइन फ़्लू. दुनिया उनके जवाब पाने के लिए हमारी ओर देख रही है.

उन्होने कहा, “अगर कभी एकजुट होकर काम करने की ज़रूरत थी, ये दिखाने की ज़रूरत थी कि संयुक्त राष्ट्र सामूहिक रूप से क़दम उठा सकता है तो वो क्षण अब है”.

उन्होने सभी देशों के नेताओं से आग्रह किया कि वो जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए आपसी मतभेद भुलाकर सहमति तक पहुंचे.

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