पिट्सबर्ग में जी-20 की शिखर बैठक

जी-20 के नेता

वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए बने संगठन जी-20 का तीसरा शिखर सम्मेलन अमरीका के पेन्सिल्वेनिया राज्य के पिट्सबर्ग शहर में होने जा रहा है.

दो दिन की इस बैठक में पिछली बैठकों में किए गए वायदों और संकल्पों की समीक्षा की जाएगी.

दुनिया के 19 महत्वपूर्ण देश और यूरोपीय संघ इसके सदस्य हैं. भारत भी जी-20 का एक महत्वपूर्ण सदस्य है.

जी-20 दुनिया के महत्वपूर्ण औद्योगिक और विकासशील देशों का एक संगठन है जिसकी स्थापना 1999 में हुई थी.

मूलतः जी-20 की बैठकों में 20 सदस्यों के वित्त मंत्रियों और वहाँ के केंद्रीय बैंकों के गवर्नर हिस्सा लिया करते थे लेकिन वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण हाल के समय में संगठन का चरित्र काफ़ी बदला है.

तीसरा सम्मेलन

वैश्विक आर्थिक संकट का जवाब तलाश करने के उद्देश्य से नवंबर 2008 में वाशिंगटन में जी-20 का पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया.

वाशिंगटन बैठक में जुटे नेताओं ने एक कार्ययोजना तैयार की जिसकी समीक्षा के लिए छह महीने बाद लंदन में अप्रैल 2009 में फिर से शिखर बैठक की गई.

जी-20 की लंदन शिखर बैठक में आए नेताओं ने इस वर्ष के अंत तक समूह की एक और बैठक करवाने की माँग की थी.

इसी दौरान राष्ट्रपति ओबामा ने छह महीने बाद सितंबर में पिट्सबर्ग में जी-20 का अगला शिखर सम्मेलन कराए जाने की घोषणा की थी.

सुधार के संकेत

पिट्सबर्ग बैठक ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होने के संकेत मिल रहे हैं.

हालाँकि सुधार के ये संकेत बहुत प्रबल नहीं हैं लेकिन इससे जी-20 बैठक में जुटे नेताओं को एक दीर्घकालिक सोच बनाने में सहायता अवश्य मिलेगी.

नेताओं के सामने एक महत्वपूर्ण मुद्दा विश्व की अर्थव्यवस्था में असंतुलन का मुद्दा है जिसे संकट का एक महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है.

बताया जा रहा है कि अमरीका और दूसरे कुछ देशों में बहुत कम बचत होने और चीन जैसे देश में बहुत अधिक बचत होने के कारण अमरीका के अंतरराष्ट्रीय व्यापार में बहुत बड़े घाटे की स्थिति बनती गई जिसने बाद में संकट का रूप ले लिया.

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