एनपीटी पर भारत नहीं करेगा दस्तख़त

शशि थरूर
Image caption शशि थरूर ने एनपीटी को भेदभावपूर्ण बताया है.

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त नहीं करेगा क्योंकि यह भेदभावपूर्ण है.

ग़ौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर उन सभी देशों से परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर करने को कहा है, जिन्होंने अभी तक इस संधि को स्वीकार नहीं किया है.

इस पर दस्तख़त नहीं करने वाले देशों में भारत, पाकिस्तान और इसराइल जैसे देश शामिल हैं. उत्तर कोरिया इससे पहले पहले ही अलग हो चुका है.

भारतीय विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर ने शुक्रवार रात पत्रकारों से कहा, "लंबे समय से हमारी ये नीति रही है कि पूरी दुनिया से परमाणु हथियार ख़त्म किए जाएँ. लेकिन हम ऐसी कोई संधि स्वीकार नहीं कर सकते जिसके तहत कुछ देशों को ऐसे हथियार रखने की इजाज़त मिलती हो."

भारत और इस संधि पर हस्ताक्षर न करने वाले देशों का तर्क है कि विकसित देशों ने पहले ही परमाणु हथियारों का भंडार बना लिया है और बाक़ी देशों पर अप्रसार संधि थोप रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरदीप पुरी ने अमरीकी स्थाई प्रतिनिधि सुसान ई राइस को लिखे पत्र में भी भारतीय पक्ष को विस्तार से पेश किया है.

इसमें कहा गया है कि भारत बाहर से सुझाए गए ऐसे किसी नियम या मापदंड को स्वीकार नहीं करेगा जो उसके राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हो या संप्रभुता का उल्लंघन करते हों.

भारत ने कहा कि वह एनपीटी में गैर परमाणु हथियार सम्पन्न देश के रूप में शामिल नहीं हो सकता है हालांकि उसने परमाणु परीक्षण नहीं करने और पहले हथियार का उपयोग नहीं करने की बात पर ज़ोर दिया है.

संबंधित समाचार

संबंधित इंटरनेट लिंक

बीबीसी बाहरी इंटरनेट साइट की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है