शिकारी शार्क की शरणस्थली

  • 25 सितंबर 2009
Image caption शार्क का बहुत बड़े पैमाने पर शिकार हो रहा है

प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटे से द्वीप देश पलाऊ ने अपनी जल सीमा में शार्क के शिकार पर रोक लगाकर एक नई मिसाल पेश की है.

पलाऊ के राष्ट्रपति जॉनसन टोरीबियोंग ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में इसकी घोषणा की, दुनिया भर में शार्क ख़तरे में हैं क्योंकि उनका बहुत बड़े पैमाने पर शिकार हो रहा है, शार्क को बचाने के अभियान में लगे लोगों का कहना है यह बहुत अहम क़दम है.

पलाऊ की पाबंदी का मतलब है कि लगभग छह लाख वर्ग किलोमीटर के दायरे शार्कों का शिकार बंद हो जाएगा.

राष्ट्रपति टोरीबियोंग ने कहा कि पूरी दुनिया के देशों को शार्क के शिकार और उसके डैने काटने पर रोक लगाई जानी चाहिए. शार्क फिन सूप की लोकप्रियता की वजह से बहुत बड़ी संख्या में उन्हें पकड़ा जाता है.

एक अनुमान के मुताबिक़ दुनिया भर में लगभग एक करोड़ शार्क मछलियाँ हर साल मारी जाती हैं.

राष्ट्रपति टोरीबियोंग ने कहा, "बहुत बड़ी संख्या में शार्कों का शिकार हो रहा है जो बहुत चिंता की बात है और अगर जल्द ही कुछ नहीं किया गया तो वे विलुप्त होने के कगार पर पहुँच जाएँगी. मेरी नज़र में शार्क की शक्ति, सुंदरता और फुर्ती समुद्री जीवन का सबसे प्रभावी प्रतीक है."

कई देशों में शार्क के शिकार की सीमा तय कर दी गई लेकिन यह पहला मामला है जब किसी देश ने पूरी रोक लगा दी है.

ग्लोबल शार्क कंज़रवेशन के निदेशक मैट रैंड कहते हैं, "पलाऊ ने स्वस्थ समुद्री पर्यावरण में शार्क की अहम भूमिका को अच्छी तरह समझा है और पूरे जलक्षेत्र को शार्क अभयारण्य घोषित कर दिया है जो एक बहुत अहम क़दम है."

रैंड का कहना है कि शार्क की लगभग 130 विलुप्तप्राय प्रजातियाँ पलाऊ के आसपास के समुद्र में रहती हैं, इस नए क़दम से उनकी तादाद बढ़ेगी.

पलाऊ की कुल आबादी सिर्फ़ 20 हज़ार है लेकिन उसकी जलसीमा काफ़ी बड़ी है जिसमें 200 से अधिक टापू हैं, पलाऊ की आय का मुख्य स्रोत पर्यटन है.

पलाऊ ने प्रतिबंध तो लगा दिया है लेकिन उसके पास अपनी जलसीमा की निगरानी के लिए सिर्फ़ एक ही बोट है, हाल में की गई हवाई जाँच से पता चला कि लगभग 70 जहाज़ गैर कानूनी ढंग से पलाऊ की जलसीमा में मछलियाँ पकड़ रहे थे.

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