ज़िंदा लोगों के मिलने की संभावना कम

  • 4 अक्तूबर 2009
इंडोनेशिया
Image caption मलबे से लोगों को निकालने की कोशिश

इंडोनेशिया के पश्चिम सुमात्रा में चार दिन पहले आए भीषण भूकंप के बाद अब राहतकर्मियों का ध्यान मलबे में दबे हुए लोगों से हटकर हज़ारों की संख्या में घायल और बेघर हुए लोगों के हाल की तरफ जा रहा है.

सिर्फ़ पश्चिमी सुमात्रा की राजधानी पडांग में ही हज़ारों लोग या तो मारे गए हैं या लापता हैं. लेकिन शहर के बाहरी ग्रामीण इलाक़ों में मदद पहुँचना अब शुरू हुआ है.

इनमे से कई गाँव मलबे और भूस्खलन में दबकर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं.

आपातकाल में मदद के लिए इंडोनेशिया पहुंचे राहतकर्मियों का मानना है कि सुमात्रा के दूर दराज़ के ग्रामीण इलाकों में जब शक्तिशाली भूकंप आया, तब हज़ारों की संख्या में लोग मरे होंगे.

कुछ गाँव तो पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और गाँव तक मदद पहुँचाने के लिए सड़क भी नहीं बची है. घायलों की मदद के लिए चिकित्सकों के दल को पहुँचने में बड़ी दिक्कतें आ रही हैं.

मदद तो इंडोनेशिया पहुँच रही है लेकिन भूकंप से सबसे ज़्यादा प्रभावित शहर पडांग में अब किसी को मलबे से ज़िंदा बाहर निकालने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है.

हालाँकि बचाव के काम का केंद्र अब भी पडांग शहर ही बना हुआ है लेकिन इस बात को लेकर भी गभीर चिंता है कि शायद अब किसी को ज़िंदा बचा पाने के लिए काफी देर हो चुकी है.

संदेश

पडांग में अम्बाकंग होटल के बचाव दल के प्रमुख आरका मेल्वी कर्माणि ने कहा कि उन्हें मलबे में दबे एक व्यक्ति का मोबाइल फ़ोन से संदेश यानी एसएमएस मिला.

कर्माणि ने बताया कि संदेश में लिखा था," बचाव के लिए इस्तेमाल किए जा रहे भारी मशीनों को और आगे मत धकेलो, नहीं तो हम कुचल जाएँगे."

मलबे में उस जगह पर आठ लोग दबे हुए थे. बचाव के लिए रुख़ अब शहर से दूर गांवों का किया गया है.

पडंग से दूर पारिअमान शहर में बचाव दल की मदद से लोग अपने परिजनों को अब भी बेतहाशा तलाश रहे हैं.

ज़म्जीमार्लिस नाम के एक इण्डोनेशियाई ने बताया कि "मेरे पूरी तरह बर्बाद हो चुके घर के अन्दर मेरी बीवी, बच्चा और सास दबे हुए हैं. भूस्खलन से मेरा घर दो सौ मीटर दूर तक चला गया है. मैं सबों को खोज रहा हूँ, पर अबतक कोई मिला नहीं."

लेकिन इन इलाक़ों तक पहुंचना मुश्किलों भरा काम है और यहाँ कितनी क्षति हुई है,जान और माल का, इसका कोई अंदाज़ा भी नहीं है.

जो बचाव और राहत दल भूकंप प्रभावित गांवों तक पहुँच पाए हैं, उनका कहना है कि अभी सैकड़ों और मरे हो सकते हैं.

अधिकारियों ने बताया है कि सुमात्रा के कम से कम तीन गाँव भूकंप से हुए भूस्खलन में पूरी तरह ख़त्म हो गए हैं. डर ये है कि कहीं पूरी की पूरी एक जाति इस भूकंप की भेंट न चढ़ गयी हो.

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