हेर्ता को नोबेल सम्मान

  • 8 अक्तूबर 2009
हेर्ता मुलर
Image caption हेर्ता मुलर, नोबेल पुरुस्कार विजेता

साहित्य के लिए इस साल का नोबेल पुरुस्कार रोमानिया में जन्मी जर्मन लेखिका हेर्ता मुलर को दिए जाने की घोषणा की गई है.

रोमानिया में पूर्व कम्यूनिस्ट शासक निकोलई सिज़ेस्क्यू के दौर में अल्पसंख्यक जर्मन समुदाय की मुश्किलों भरी ज़िंदगी का सजीव चित्रण प्रस्तुत करने के लिए हेर्ता मुलर को जाना जाता है.

स्वीडिश एकेडमी के स्थाई सचिव पीटर इंग्लैंड ने मुलर के काव्य और गद्य कौशल की सराहना करते हुए कहा कि लेखिका ने तत्कालीन रोमानिया में पिसते अल्पसंख्यक समुदाय के जीवन की विडंबनाओं का गहन कविता और उनमुक्त गद्य के माध्यम से सजीव ख़ाका खींचा है.

हेर्ता मुलर 1953 में रोमानिया में जर्मन अल्पसंख्यक परिवार में पैदा हुईं और उनकी माता को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पूर्व सोवियत संघ स्थित बंदी शिविर में भेज दिया गया था.

1970 के दशक में रोमानिया के तत्कालीन प्रशासन के साथ सहयोग से इंकार के बाद हेर्ता मुलर को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी और 1987 में वे जर्मनी चली गईं. जर्मन भाषा में उनकी कहानियों का पहला संग्रह छपा, जिसे रोमानिया में सेंसर कर दिया गया था.

मुलर को अपने लेखन के लिए कई पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें 1998 में मिला ‘आयरिश रिपब्लिक इंपैक एवार्ड’ भी शामिल है.

सन 2001 में उनकी ‘दि एपाइंटमेंट’ प्रकाशित हुई, जिसमें उन्होंने विकास की राह रोकने वाले निरंकुश तंत्र के बीच पिसते जीवन के कई पहलुओं को उजागर किया.

हेर्ता मुलर की कुछ ही पुस्तकों का अंग्रेज़ी में अनुवाद हुआ है, जिनमें 'दि एपाइंटमेंट' सहित, 1986 में छपी 'पासपोर्ट', और 1994 में प्रकाशित 'दि लैंड ऑफ ग्रीन प्लम्स' शामिल है.

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