सर्न का शोधकर्ता गिरफ़्तार

  • 10 अक्तूबर 2009
Image caption सर्न में महाप्रयोग चल रहा है

फ़्रांस के अंतरराष्ट्रीय परमाणु शोध संस्थान सर्न में काम करने वाले एक शोधकर्ता को गिरफ्तार किया गया है.अधिकारियों का आशंका है कि यह व्यक्ति अल क़ायदा से जुड़ा हुआ है.

ये व्यक्ति अल्जीरियाई मूल का है और स्विट्ज़रलैंड की सीमा पर स्थित यूरोपीय परमाणु शोध संस्थान सर्न की प्रयोगशाला में काम करता था.

फ़्रांस की पुलिस ने उसे और उसके भाई को पिछले बृहस्पतिवार को विएन्ने कस्बे में गिरफ्तार किया था.

पुलिस का मानना है कि ये दोनों भाई इंटरनेट पर अल क़ायदा इस्लामिक मग़रिब नामक चरमपंथी गुट से संपर्क बनाए हुए थे और फ्रांस के भीतर हमलों की योजना बना रहे थे.

सर्न की इस प्रयोगशाला में हेड्रोन कोलाइडर नामक एक बड़ी मशीन की मदद से प्रकृति की उत्पत्ति के समय हुए बिग बैंग प्रभाव जैसी स्थितियाँ पैदा करने का प्रयोग किया जा रहा है.

सर्न स्विट्ज़रलैंड और फ्रांस की सीमा पर स्थित एक शोध संस्था है और इसमें कई सदस्य देशों के इंजीनियर काम करते हैं. यह संस्था परमाणु भौतिक शास्त्र से संबंधित शोध में लगी है.

सर्न का कहना है, "ये व्यक्ति सर्न का कर्मचारी नहीं था और एक बाहरी सहयोगी संस्थान के अंतरगत सर्न के लिए काम कर रहा था और उसका संबंध किसी ऐसी चीज़ से नहीं था जिसका प्रयोग आतंकवादी कामों के लिए किया जा सके.”

स्थायी ख़तरा

ये दोनों भाई एक अदालत द्बारा जारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार किए गए हैं.

अदालत के सूत्रों ने एएफपी समाचार एजेंसी को बताया कि खुफ़िया अधिकारी दरअसल कुछ ऐसे लोगों की तलाश में थे जो अफ़गानिस्तान में लड़ने के लिए इस्लामिक चरमपंथी युवकों को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रहे थे.

इसी अभियान के दौरान इन दोनों भाइयों के नाम सामने आए.

सर्न के इस शोधकर्ता ने इंटरनेट पर कुछ ऐसे लोगों से संपर्क किया था जो अल कायदा इस्लामिक मग़रिब नामक चरमपंथी गुट से संपर्क बनाए हुए थे और जिन्होंने फ्रांस के भीतर हमलों की इच्छा व्यक्त की थी.

सर्न के एक अधिकारी के अनुसार ये लोग अभी हमलों की तैयारी के लिए कोई ठोस क़दम उठाने की स्थिति में नहीं पहुंचे थे.

अभी तक ये मालूम नहीं हो सका है कि शोधकर्ता का 25 वर्षीय भाई इस योजना में कहाँ तक शामिल था.

इन भाइयों की गिरफ्तारी के बाद उनके घर से दो कंप्यूटर, तीन हार्ड ड्राइव और कुछ डाटा संजोने वाली यूएसब. ड्राइव बरामद की गईं हैं.

फ्रांस के गृह मंत्री ब्राइस होर्तेफो ने पत्रकारों को बताया,"यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि फ्रांस या अन्य देशों में वे किसे अपना निशाना बनाना चाहते थे और शायद यह एक संकेत है कि हमने किसी बड़ी अनहोनी को टाल दिया है."

उन्होंने कहा, "हम हमेशा सजग रहतें हैं और हम कुछ संगठनों के नेताओं के वक्तव्यों पर हर रोज़ नज़र रखतें हैं. हम कभी इसमें ढील नहीं देते क्योंकि हम जानते हैं कि यह एक स्थायी ख़तरा है."

अल कायदा इस्लामिक मग़रिब नामक यह चरमपंथी गुट सन 2007 में सामने आया था. यह गुट मूलतः अल्जीरियाई सलाफी चरमपंथी गुट जीएसपीसी से निकला था और फिर उसने ओसामा बिन लादेन के संगठन से नाता जोड़ लिया था.

पिछले अगस्त माह में मौरीतानिया में फ्रांस के दूतावास पर हुए आत्मघाती हमले की ज़िम्मेदारी इसी गुट ने ली थी. इस हमले में तीन लोग घायल हुए थे.

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