भारतीय सांसद श्रीलंका के दौरे पर

  • 11 अक्तूबर 2009
तमिल शरणार्थी
Image caption सैनिक कैम्पों में रह रहे हैं लाखों तमिल शरणार्थी

तमिलनाडु के कुछ सांसदों का दल रविवार को श्रीलंका में उन शिविरों का दौरा करेगा जहाँ करीब तीन लाख तमिल शरणार्थी रह रहे हैं.

सांसदों का ये दल शनिवार को श्रीलंका पहुंचा. दौरे का मुख्य उद्देश्य है शिविरों में रहने वाले लोगों की स्थिति का जायज़ा लेना.

इस साल की शुरुआत में जब श्रीलंका की सेना और तमिल विद्रोही गुट एलटीटीई के बीच निर्णायक युद्घ हुआ तब करीब तीन लाख तमिल अल्पसंख्यक इस युद्घ से अपनी जान बचाकर भागे थे.

इन्हें श्रीलंका की सरकार ने शिविरों में रखा जहाँ इनके रहने के हालात पर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए हैं.

सरकार के एक प्रवक्ता एपी शक्तिवेल ने कहा है कि सांसदों का ये दल अपने श्रीलंका दौरे के तहत वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं और वहां के अधिकारियों से मुलाक़ात करेगा.

आलोचना

इस दल के श्रीलंका दौरे पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आलोचनात्मक प्रतिक्रिया दी है.

पार्टी के नेता और सांसद डी राजा ने कहा है कि इस दल में कौन जाएगा, इस पर सरकार ने राजनीतिक दलों से कोई विचार विमर्श नहीं किया है और ये दल सबका प्रतिनिधित्व भी नहीं करता.

डी राजा ने इस दल के दौरे के उद्देश्य पर भी सवाल उठाए हैं.

इन सांसदों के दल में विपक्षी दलों के प्रतिनिधित्व को नज़रअंदाज़ करने के आरोप को बेबुनियाद ठहराते हुए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के करूणानिधि ने कहा कि जो लोग श्रीलंका गए हैं, उन्हें केंद्र सरकार ने नहीं भेजा है.

करूणानिधि ने कहा, "जब सरकार कोई दल भेजती है तो वो उसका ख़र्च उठाती है, और तभी किसी ऐसे दल में सभी दल के सांसद शामिल किए जाते हैं. लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है.यहाँ ख़र्च उन राजनीतिक दलों ने ही दिए हैं, जिनके सांसद इस दल में गए हैं.

न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने श्रीलंका सरकार से कहा है कि वो सैनिक शिविरों में रह रहे लगभग तीन लाख तमिल शरणार्थियों को मॉनसून आने से पहले अपने घरों को लौट जाने दे जिससे कि बारिश से पैदा होने वाली परेशानियों से वो बच सकें.

दूसरे मानवाधिकार संगठन भी तमिलों को इस तरह कैंपों में रखे जाने का विरोध ये कहकर कर रहे हैं कि ये एक तरह की सामूहिक सज़ा है और ये गै़रक़ानूनी भी है.

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