श्रीलंका चुनाव समय से पहले

महिंदा राजपक्षे
Image caption महिंदा राजपक्षे अभी से जीतने का दावा कर रहे हैं.

श्रीलंका के सरकारी रेडियो के मुताबिक देश में राष्ट्रपति और संसद के चुनाव अप्रैल 2010 से पहले होंगे.

तमिल विद्रोहियों के साथ संघर्ष में सेना की जीत के पाँच महीनों बाद और प्रांतीय चुनावों में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की गठबंधन सरकार की आठवीं जीत के तीन दिन बाद ये घोषणा हुई है.

माना जा रहा है कि इस समय सरकार के ऊंचे मनोबल और बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए गठबंधन सरकार ने पूर्वनिर्धारित समय से दो साल पहले चुनाव करवाने का फ़ैसला किया है.

श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहली समुदाय में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे बेहद लोकप्रिय हैं इसीलिए चुनावों में उनकी भारी बहुमत से जीत तय मानी जा रही है.

विपक्ष की स्थिति काफी कमज़ोर है इसीलिए राष्ट्रपति राजपक्षे को दो तिहाई बहुमत मिलने की आशा है, जिसके बाद वे सांविधानिक बदलाव कर सकेंगे.

संभावना है कि इन बदलावों के तहत राष्ट्रपति के लिए दो से ज्यादा बार सत्ता में रहने के प्रावधान रखे जाएंगे.

राष्ट्रपति राजपक्षे ने कहा है कि तमिल समुदाय की शिकायतों से संबंधित राजनीतिक सुधारों की घोषणा, वे चुनाव नतीजे आने के बाद ही करेंगे.

हालांकि देश के विभिन्न समुदायों में मेलमिलाप और समन्वय की ज़रूरत पर राजपक्षे सहित अधितकर वरिष्ठ नेता सहमत हैं.

सोमवार को राष्ट्रपति राजपक्षे ने उत्तर से नवनर्वाचित स्थानीय नेताओं को तमिल भाषा में संबोधित किया और विस्थापित तमिलों की समस्याओं के जल्द निपटारे का आश्वासन भी दिया.

राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के आलोचकों का ये मानना है कि तमिल समुदाय के साथ मेलमिलाप और राजनीतिक सुधार के बारे में राष्ट्रपति के पास कोई स्पष्ट योजना या धारणा नहीं है. उदाहरण के लिए, वे ये नहीं बता पा रहे कि तमिल बहुल इलाकों के लिए उनके पास क्या योजनाएं हैं.

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मे श्रीलंका के पूर्व राजदूत रह चुके दयान जयतिलका ने अपने एक लेख में लिखा है कि सरकार ने युद्ध के बाद की व्यवस्था के बारे में कोई तस्वीर सामने नहीं रखी.

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