'इराक़ हमले ने ली 85000 लोगों की जान'

इराक़ में 2004 से लेकर 2008 के बीच 85 हज़ार से ज़्यादा इराक़ियों की मौत हुई है. युद्ध शुरु होने के बाद पहली बार इराक़ सरकार ने इस तरह के आँकड़े जारी किए हैं.

ये आँकड़े स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी मौत के प्रमाणपत्रों पर आधारित है और इसमें 15 हज़ार ऐसे शव हैं जिनकी पहचान नहीं हो सकी.

इराक़ सरकार के आँकड़ों में सैनिक, पुलिसकर्मी और नागरिक शामिल हैं लेकिन मारे गए ऐसे लोग शामिल नहीं है जो विदेशी थे या चरमपंथी थे.

इससे पहले मृतकों की संख्या तय करने की सारी कोशिशें विवादित रही हैं.

पिछली रिपोर्टों में मृतकों की संख्या कई तरह के तरीकों की मदद से तय की गई थीं और इन अनुमानों के मुताबिक 2003 के बाद से एक लाख से लेकर पाँच लाख तक लोग मारे गए है.

आँकड़ों पर विवाद

इराक़ सरकार की नई रिपोर्ट में 2003 के बाद के शुरुआती कुछ महीने शामिल नहीं है जब अमरीकी नेतृत्व में वहाँ हमला किया गया था. उस समय इराक़ सरकार काम नहीं कर रही थी.

रिपोर्ट में कहा गया है, "चरमपंथी हमलों, बम विस्फोटों, हत्या, अपहरण और विस्थापन के कारण इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है. इराक़ी लोगों के लिए ये एक बड़ी चुनौती है."

मारे गए लोगों में 1279 बच्चे, 2334 महिलाएँ, 263 प्रोफ़ेसर, 21 जज, 95 वकील और 269 पत्रकार शामिल हैं.

ये केवल हिंसा का शिकार हुए लोगों की सूची है जिसमें गोलीबारी में मौत, बम हमले और सर कलम करने जैसी घटनाएँ शामिल हैं.

इसमें मौत के अप्रत्यक्ष कारण शामिल नहीं है जैसे इमारतों का नष्ट होना, ख़राब स्वास्थ्य सेवाएँ और तनाव.

इस दौरान एक लाख 48 हज़ार लोग घायल भी हुए हैं. इराक़ पर हमले के पक्षधर और विरोधी एक दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं कि वे मृतकों की संख्या को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे हैं या घटा कर ताकि अपना राजनीतिक फ़ायदा हो सका.

लेकिन सच्चाई ये है कि हमले के बाद जो हिंसा और अव्यवस्था फैली, उस कारण मारे गए लोगों की असल संख्या कभी पता नहीं चल पाएगी.

इराक़ बॉडी काउंट के आँकड़ों के मुताबिक 93540 लोग मारे गए हैं. ये वो ग़ैर सरकारी संगठन है जो इराक़ पर हमले के बाद सही मृतकों की संख्या पर नज़र रखे हुए है.

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