ख़ज़ाने को लेकर जंग छिड़ी

Image caption अरबों डॉलर के इन बॉंडों के दावेदार या तो मर चुके हैं या उनके बारे में भूल चुके हैं.

मंदी के माहौल में अमरीकी सरकार को एक भूला-बिसरा खज़ाना हाथ लगा है लेकिन उस पर हक़ राज्य सरकारों का हो या केंद्र का इस पर विवाद शुरू हो गया है.

1940 में जब द्वितीय विश्व युद्द चरम पर था तो सरकार ने अरबों डॉलर के बचत बॉंड जारी किए थे जिसके कि अमरीका युद्ध के खर्चे को उठा सके.

उसमें शर्त ये भी थी कि उन बॉंडों को चालीस साल के बाद ही भुनाया जा सकेगा.

पहला बॉंड खरीदा तब राष्ट्रपति फ़्रैंकलिन रूज़वेल्ट ने और अमरीकियों से कहा कि इन बॉंडों को खरीदना एक तरह से उनका राष्ट्रधर्म है.

मर गए या भूल गए

अब जाकर पता चला है कि लगभग 16 अरब डॉलर के बॉंड वैसे ही रखे हुए हैं और उन्हें भुनाने कोई नहीं आया है.

उनके मालिकों की या तो मृत्यु हो चुकी है या फिर पुराने बस्तों और आलमारियों में धूल खार रहे इन कीमती कागज़ों के बारे में लोग भूल चुके हैं.

अब अमरीका के छह राज्यों ने केंद्रीय सरकार पर मुकदमा दायर कर दिया है कि ये पैसा उन्हें मिलना चाहिए.

ये राज्य हैं केंटकी, मिसूरी, मोंटाना, न्यू जर्सी, नॉर्थ कैरोलाइना और ओकलाहोमा.

उनके वकील ये दावा करेंगे कि क्योंकि केंद्रीय वित्त विभाग ने इन बॉंडधारकों या उनके वारिसों को ढूंढने की कोई कोशिश नहीं की इसलिए ये पैसा उन राज्यों को दे दिया जाना चाहिए जहां के वो रहनेवाले थे.

अमरीकी क़ानून के तहत राज्य सरकारों को ये अधिकार है कि कोई ऐसी संपत्ति जिस पर किसी की दावेदारी नहीं हो उसपर वो क़ब्ज़ा कर सकें.

इस मामले की सुनवाई आनेवाले हफ़्ते न्यू जर्सी की अदालत में होगी.

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