कुवैती महिलाओं को पासपोर्ट का अधिकार

कुवैती महिला
Image caption कुवैती महिलाओं को बिना पति की अनुमति के पासपोर्ट हासिल करने का अधिकार मिला.

कुवैती महिलाएं अब अपने पतियों की अनुमति लिए बिना अपना पासपोर्ट हासिल कर सकेंगी.यह फ़ैसला कुवैत की संवैधानिक अदालत ने दिया है और जो अंतिम है.

अदालत ने कहा कि पति की अनुमति लेने वाली शर्त कुवैत के संविधान का उल्लंघन है जो सभी नागरिकों को समान अधिकारों और आज़ादी की गारंटी देता है.

यह फ़ैसला उस महिला की अपील पर दिया गया जिसने शिकायत की थी कि उसके पति ने उसे कुवैत से बाहर जाने से रोका.

कुवैत की संवैधानिक अदालत ने देश के 1962 के उस पासपोर्ट क़ानून को रद्द कर दिया जिसमें किसी भी महिला की पासपोर्ट अर्ज़ी पर उसके पति के हस्ताक्षर होने ज़रूरी थे.

असील अल अवधी ने इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए इसे 'संवैधानिक सिद्धान्तों की विजय' बताया जिससे कुवैती महिलाओं के साथ हो रहे अन्याय का अंत हो गया है.

सरकारी मकानों के अधिकार की मांग

कुवैती महिलाओं के लिए ये एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है जहां हाल के वर्षों में महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता की ओर कई क़दम उठाए गए हैं.

वर्ष 2005 में महिलाओं को समान राजनीतिक अधिकार मिले थे. उससे अगले साल पहली बार महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला. और इसी साल कुवैत की संसद में पहली महिला सांसद का चुनाव हुआ है.

कुवैत में महिलाओं को पड़ोसी देश सउदी अरब से कहीं अधिक आज़ादी प्राप्त है जहां महिलाओं और पुरुषों को अलग अलग रखने के सख़्त क़ानून हैं और महिलाओं को कार चलाने तक की अनुमति नहीं है.

समान अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही महिलाओं ने अदालत के इस फ़ैसले का स्वागत किया लेकिन साथ ही कहा कि उन्हे सरकारी मकानों और अपने बच्चों को नागरिकता का अधिकार देने का भी समान अधिकार मिलना चाहिए.

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