पुलिस अधिकारी की रिहाई का सौदा

पश्चिम बंगाल सरकार ने अपहृत पुलिस अधिकारी अतींद्रनाथ दत्त की रिहाई के बदले राज्य के लालगढ़ क्षेत्र में कम से कम चौदह आदिवासी महिलाओं को छोड़ने का फ़ैसला किया है.

माओवादी नेता कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में ये जानकारी दी.

किशनजी ने कहा, ‘यदि राज्य सरकार अपनी बात पर क़ायम रहती है तो हम पुलिस अधिकारी को छोड़ देंगे.’

वहीं राज्य सरकार का कहना है कि बुधवार शाम किशनजी और राज्य के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के बीच जो गुप्त बातचीत हुई है उस पर अमल किया जाएगा.

दोनों पक्षों के बीच इस बातचीत के दौरान बीबीसी के दो संवाददाता मौजूद थे जिनमें इन पंक्तियों का लेखक भी था.

इस पुलिस अधिकारी ने किशनजी से कहा, ‘माओवादियों के साथ कथित संबंधों की आशंका में गिरफ़्तार इन आदिवासी महिलाओं के ख़िलाफ़ फ़िलहाल कोई क़ानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. लेकिन हम चाहते हैं कि इससे पहले माओवादी पुलिस इंस्पेक्टर दत्ता को छोड़ दें’

बातचीत के दौरान किशनजी ने कहा, ‘वो अपने लोगों से इन महिलाओं की ज़मानत के लिए अर्ज़ी दाख़िल करने को कहेंगे और अगर सरकार इसका विरोध नहीं करती तो पुलिस अधिकारी को अगले कुछ दिनों में किसी जगह पर छोड़ दिया जाएगा.’

पुलिस इंस्पेक्टर अतींद्रनाथ दत्ता का मंगलवार को उस वक़्त अपहरण कर लिया गया था, जब दर्ज़नों माओवादियों ने राज्य के संकरैल क़स्बे में एक बैंक और पुलिस थाने पर धावा बोल दिया था.

इस दौरान दो पुलिसकर्मियों की मौत भी हुई थी.

इसके बाद माओवादियों ने कहा था कि वो पुलिस इंस्पेक्टर को इस शर्त पर रिहा करेंगे कि सरकार जेल में बंद निर्दोष आदिवासी महिलाओं को रिहा करे.

माओवादी नेता किशनजी ने बीबीसी को बताया, ‘बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं को पकड़कर पुलिस ने तमाम आरोप मढ़ दिए हैं. हम सरकार से मांग करते हैं कि इन आदिवासी महिलाओं की बिना शर्त रिहाई की जाए और फिर हम पुलिस अधिकारी को छोड़ देंगे.’

हालांकि उन्होंने इसके साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर पुलिस और अर्ध सैनिक बलों ने इंस्पेक्टर की रिहाई के लिए कोई अभियान चलाया तो उनकी जान ख़तरे में पड़ सकती है.

किशनजी ने अपहृत पुलिस इंस्पेक्टर की पत्नी से भी बात की और उन्हें आश्वस्त किया कि उनके पति की हत्या नहीं की जाएगी.

किशनजी ने बीबीसी को बताया, ‘हम उनके साथ युद्ध बंदी की तरह व्यवहार करेंगे और उनसे आपको मिलने की भी इजाज़त देंगे, लेकिन आप किसी पुलिस वाले को अपने साथ नहीं लाएंगे. लेकिन हम उन्हें रिहा तभी करेंगे, जबकि वृद्ध महिलाओं को रिहा किया जाएगा.’

इससे पहले पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अशोक मोहन चक्रवर्ती ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि सरकार पुलिस इंस्पेक्टर की रिहाई के लिए किसी तरह की पुलिस कार्रवाई करने पर विचार नहीं कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘हम माओवादियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और चाहते हैं कि ये मामला बातचीत के ज़रिए ही सुलझ जाए.’

माओवादियों ने मंगलवार को मोटरसाइकिलों से इस इलाक़े में धावा बोला था और पत्रकारों का कहना है कि ये जून महीने के बाद इस इलाक़े में अब तक का सबसे बड़ा माओवादी हमला था.

माओवादी हिंसा के बीस साल के दौर में अब तक छह हज़ार से भी ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है.

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