बापू की विरासत स्वदेश लौटेगी

इस ऑडियो/वीडियो के लिए आपको फ़्लैश प्लेयर के नए संस्करण की ज़रुरत है

किसी और ऑडियो/वीडियो प्लेयर में चलाएँ

लंदन में आयोजित एक समारोह में भारतीय मूल के दो उद्योगपतियों सर ग़ुलाम नून और प्रोफ़ेसर रामनाथ पुरी ने महात्मा गांधी के हस्तलिखित पत्र राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को सौंपे.

उन्होंने ये पत्र जुलाई महीने में एक नीलामी में हासिल किए थे. सर ग़ुलाम नून और प्रोफ़ेसल रामनाथ पुरी ने उर्दू और अँगरेज़ी में लिखी ये चिट्ठियाँ लगभग 21 हज़ार पाउंड यानी लगभग 17 लाख रुपए में ख़रीदी थीं.

इनमें से कई पत्र 1920 के दशक में महात्मा गांधी ने इस्लाम के विद्वान मौलाना अब्दुल बारी को उर्दू में उनके लखनऊ के पते पर लिखे थे.

इन पत्रों में गांधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता पर ज़ोर दिया है. इनमें से एक चिट्ठी गांधी जी ने जेल से लिखी है जिसमें चरखा और सूत भेजने के लिए मौलाना बारी का शुक्रिया अदा किया गया है.

इसके अलावा दो और पोस्टकार्ड हैं जो गांधी जी ने उर्दू के शायर हमीदुल्ला अफ़सर को लिखे थे.

राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने इस मौक़े पर कहा, "भारत के लोगों के दिल में महात्मा गांधी का एक विशेष स्थान है और उनसे जुड़ी चीज़ें हर भारतीय के लिए बहुत अहम है. मैं प्रोफ़ेसेर पुरी और सर ग़ुलाम नून के प्रयासों की सराहना करती हूँ, यह गांधी जी के प्रति उनकी विशेष श्रद्धांजलि है और यह भारत के प्रति उनके प्रेम को दर्शाता है".

दो लाख का रुमाल

इन चिट्ठियों के अलावा गांधी जी के हाथ का बुना हुआ खादी का एक रूमाल भी है जिस पर गांधी जी, सरोजिनी नायडू, मीराबेन और गांधी जी के निजी सचिव प्यारेलाल के हस्ताक्षर हैं.

ये रुमाल दक्षिण अफ्रीकी अभिनेत्री मोएरा लिस्टर को भेंट किया गया था. इस रूमाल को प्रोफ़ेसर पुरी और सर नून ने लगभग दो लाख रुपए में ख़रीदा. प्रोफ़ेसर पुरी ने बताया कि इन चीज़ों को भारत सरकार के लिए ख़रीदने की योजना कुछ महीने पहले बनी थी.

हमने इस नीलामी के बारे में सुना. हमारी उम्र 70 साल के करीब है और हम नहीं जानते थे कि हमारे जीवन में ऐसा मौका़ दोबारा आएगा. इसलिए हमने तय किया कि यह अवसर चूकना नहीं चाहिए.

प्रोफ़ेसर रामनाथ पुरी, ब्रिटेन के उद्योगपति

वे कहते हैं, "हमने इस नीलामी के बारे में सुना. हमारी उम्र 70 साल के करीब है और हम नहीं जानते थे कि हमारे जीवन में ऐसा मौका़ दोबारा आएगा. इसलिए हमने तय किया कि यह अवसर चूकना नहीं चाहिए."

प्रोफ़ेसर पुरी इस समारोह में इतने भावुक हो गए कि उनका गला रुंध गया और वे ठीक से अपनी बात भी नहीं कह पाए. बाद में उन्होंने कहा, "जब भी भारत की बात होती है मैं भावुक हो जाता हूँ, आज का मौक़ा तो वैसे भी बहुत भावुक था."

बापू की विरासत

करी किंग के नाम से मशहूर सर ग़ुलाम नून पहले भी दो बार गांधी जी से जुड़ी चीज़ें नीलामी में ख़रीदकर भारत सरकार को सौंप चुके हैं. वे कहते हैं कि भविष्य में भी वे गांधी जी से जुड़ी विरासत को संजोने के लिए आगे आने को तैयार हैं.

सर ग़ुलाम नून ने कहा, "मैं गांधी जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ और मैं मानता हूँ कि वैसा नेता न पहले कभी हुआ, न आगे होगा. उनकी विरासत को ख़रीदकर भारत सरकार को सौंपना मेरे लिए बहुत गर्व और ख़ुशी की बात है."

मैं गांधी जी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ और मैं मानता हूँ कि वैसा नेता न पहले कभी हुआ, न आगे होगा. उनकी विरासत को ख़रीदकर भारत सरकार को सौंपना मेरे लिए बहुत गर्व और ख़ुशी की बात है.

ग़ुलाम नून, ब्रिटिश उद्योगपति

इस समारोह में भारतीय मूल के ढेर सारे नामी-गिरामी लोग मौजूद थे जिसमें कई सांसद और बड़े उद्योगपति शामिल थे. हिंदूजा समूह के चेयरमैन श्रीचंद हिंदूजा मानते हैं कि ये चीज़े आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रहनी चाहिए.

हिंदूजा ने कहा, "हमारी आने वाली पीढ़ियों को पता लगना चाहिए कि गांधी जी जैसे नेताओं का जीवन कैसा था और हम किस तरह उनसे सीख सकते हैं. इसके अलावा उन्हें ये भी पता लगेगा कि भारत से बाहर रहने वाले उद्योगपतियों ने किस तरह विदेश में रहकर भी भारत को अपने दिल में रखा है."

प्रोफ़ेसर पुरी और ग़ुलाम नून ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार इन धरोहरों को सहेजकर रखेगी. इन पत्रों को गांधी संग्रहालय में रखा जाएगा.

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.