अमर सिंह पर मायावती का शिंकजा

अमरसिहं
Image caption अमर सिहं पर कसता माया सरकार का शिकंजा

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने समाजवादी पार्टी के नेता अमर सिंह के ख़िलाफ़ कथित आर्थिक घोटाले के मामले में शिकंजा कसते हुए जांच में केंद्रीय एजेंसियों को भी शामिल कर लिया है.

कैबिनेट सेक्रेटरी शशांक शेखर सिंह ने गुरुवार को पत्रकार सम्मेलन में बताया कि इस संबंध में कानपुर में पिछले दिनों दर्ज मुक़दमे की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा तो कर ही रही है, इसके अलावा केंद्र सरकार के प्रवर्तन निदेशालय ने भी मामले के सारे काग़ज़ात मंगा लिए हैं.

उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन ने मामले के काग़ज़ात भारत सरकार के राजस्व विभाग, कंपनी मंत्रालय में सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन आफिस, आयकर विभाग, और शेयर बाज़ार को नियंत्रित करने वाली संस्था सेबी को भी भेज दिए हैं. इन सभी से कहा गया है कि वे अपनी जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाख़ा को भेज दें.

इसका मतलब यह निकाला जा रहा है कि मायावती सरकार इस मामले की जांच अपने अधीन ही रखना चाहती है, जबकि अमर सिंह का कहना है कि कंपनियों का मामला भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित है और यह उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

शिवाकांत त्रिपाठी ने 15 अक्तूबर को कानपुर के बाबुपुरवा थाने में लिखवाई रपट में आरोप लगाया है कि अमर सिंह ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान विकास परिषद के अध्यक्ष के रूप में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए हज़ारों करोड़ रुपए के सरकारी ठेके अपनी चुनिंदा कंपनियों को दिलवाए.

आरोप है कि इस तरह भारी मात्रा में धन एकत्र होने के बाद इन कंपनियों को दो कंपनियों मेसर्स सर्वोत्तम कैप्स लिमिटेड और पंकजा आर्ट्स एंड क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड में विलय कर दिया गया.

इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को यह कहते हुए कलकत्ता पुलिस को भेज दिया था कि कानपुर पुलिस ने ग़लती से केस दर्ज कर लिया है , जबकि यह कंपनियाँ कोलकाता में रजिस्टर्ड हैं. मगर कोलकाता पुलिस ने मामला वापस भेज दिया.

अमर सिंह ने इस मामले में एक ज्ञापन राज्यपाल को देते हुए आरोप लगाया था कि माया सरकार उनका उत्पीड़न कर रही है. अमर सिंह ने यह आरोप भी लगाया था कि शिवाकांत त्रिपाठी ने सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी और मुख्यमन्त्री सचिवालय के एक अधिकारी के कहने पर यह मुक़दमा दर्ज कराया और इसके लिए बाबुपुरवा के थानेदार का तबादला करके दिनेश त्रिपाठी को विशेष तौर पर लाया गया.

मगर शिवाकांत त्रिपाठी ने इन आरोपों को ग़लत बताया है. एक पत्रकार सम्मेलन में उन्होंने आशंका ज़ाहिर की कि उन्हें अमर सिंह से जान का ख़तरा है. शिवाकांत त्रिपाठी ने यह आरोप भी लगाया कि उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार इस मामले को ठंडे बस्ते में डालना चाहती हैं.

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