लिस्बन संधि की अंतिम बाधा दूर

लिस्बन संधि

चेक गणराज्य के राष्ट्रपति वास्लाव क्लॉस ने यूरोपीय संघ में सुधार के लिए बनी लिस्बन संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसके बाद इस संधि के लागू होने की अंतिम बाधा दूर हो गई है.

समझा जा रहा है कि अब ये संधि अगले महीने से लागू हो सकती है.

लिस्बन संधि चार वर्ष पहले यूरोपीय संघ के लिए प्रस्तावित उस संविधान के मसौदे का एक बदला हुआ रूप है जिसे मंज़ूरी नहीं मिल सकी थी.

लिस्बन संधि के समर्थकों का कहना है कि इस संधि से यूरोपीय संघ और बेहतर तरीक़े से काम कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में उसका प्रभाव बढ़ेगा.

हालाँकि इसके आलोचकों का कहना है कि इस संधि से सदस्य देशों के बहुत सारे राष्ट्रीय हितों पर यूरोपीय संघ का वश हो जाएगा.

यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं जिनकी संयुक्त आबादी आधे अरब के बराबर है.

अंतिम बाधा

Image caption चेक राष्ट्रपति ने अदालत का फ़ैसला आने के कुछ ही घंटे बाद संधि पर हस्ताक्षर कर दिए

यूरोपीय संघ के 27 सदस्यों में से एकमात्र चेक गणराज्य ने लिस्बन संधि को मान्यता नहीं दी थी.

चेक गणराज्य में लिस्बन संधि पर बहस अदालत तक गई और एक संवैधानिक अदालत ने मंगलवार को फ़ैसला दिया कि ये संधि ग़ैरक़ानूनी नहीं है और ये चेक संविधान के अनुरूप है.

अदालत का फ़ैसला आने के कुछ ही घंटे बाद चेक राष्ट्रपति ने लिस्बन संधि पर हस्ताक्षर कर दिए.

लिस्बन संधि को तैयार करने में एक दशक तक विचार-विमर्श होता रहा.

यूरोपीय संघ के लिए पहले प्रस्तावित किए गए संविधान को वर्ष 2005 में फ़्रांस और नेदरलैंड्स में जनमत संग्रहों में अस्वीकार कर दिया गया था.

लिस्बन संधि को भी प्रारंभ में आयरलैंड में एक जनमत संग्रह में अस्वीकार कर दिया गया था लेकिन बाद में दूसरी बार हुए जनमत संग्रह में इसको स्वीकृति मिल गई.

सदस्य देशों में से केवल आयरलैंड ने लिस्बन संधि पर जनमत संग्रह करवाया था.

नए बदलाव

लिस्बन संधि के तहत यूरोपीय संघ के लिए दो नए बड़े पद बनाए जाएँगे – एक पद यूरोपीय परिषद के राष्ट्रपति का होगा और दूसरा यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख का भी होगा.

विदेश नीति प्रमुख का ये नया पद अभी वर्तमान के विदेश नीति प्रतिनिधि और विदेश नीति आयुक्त के पदों को मिलाकर बनाया जाएगा.

इसके अतिरिक्त लिस्बन संधि के तहत मतदान के तरीक़ों में भी बदलाव किए जाएँगे और नीतिगत मुद्दों के मामले में हर देश को दिए गए वीटो के अधिकार को सामान्य प्रबंध ना रखकर अपवाद की तरह का प्रबंध कर दिया जाएगा.

साथ ही पहली बार लिस्बन संधि के तहत किसी भी सदस्य देश को यूरोपीय संघ छोड़कर जाने का विकल्प दिया जाएगा.

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