तेल डिपो की आग से पर्यावरण प्रदूषण

तेल की डिपो में आग
Image caption जयपुर में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की तेल डिपो में लगी आग अब मंद पड़ गई है.

राजस्थान के जयपुर शहर में एक तेल डिपो में लगी आग अब मंद पड़ गई है. लेकिन बड़ी मात्रा में पेट्रोल और डीज़ल के जलने से पैदा हुए धुएं ने पर्यावरण विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है.

जन स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता की जा रही है क्योंकि बड़ी संख्या में लोगो ने आँखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की है.

उस इलाक़े के खेतो में भी कहीं कहीं काली परतें देखी जा रही हैं. सरकार का कहना है की वो इन सभी पहलुओं पर नज़र रखे हुए है.

ये तेल डिपो जयपुर के सीतापुर इलाके में है और उसके आसपास आबादी और गांव हैं जहाँ लोग खेती पर निर्भर हैं.

इस प्रचंड आग ने ग्यारह लोगों को मौत की नींद सुला दिया था और करोड़ों रूपए की सम्पत्ति आग की भेंट चढ़ गई. लेकिन अब लगता है कि इस आग ने पर्यावरण और लोगों की सेहत को भी भारी नुक़सान पहुँचाया है.

स्वास्थ्य पर असर

राजस्थान विश्वविद्यालय में वनस्पति शास्त्र के प्रोफ़ेसर के पी शर्मा ने बीबीसी से कहा, '' इस आग से उठने वाले धुएं में हाइड्रो कार्बन काफ़ी है. साथ ही ऐसे रसायन भी हो सकते हैं जो जन स्वास्थ्य के लिए ख़रतनाक हों. इसका दूरगामी असर हो सकता है क्योंकि इस धुएं में और भी तत्त्व मिल सकते है.''

के पी शर्मा कहते है, “अगर हवा तेज़ चले तो इन रसायनों का विखंडन जल्दी होगा और नुक़सान भी कम. लेकिन ये ज़्यादा दूर तक मार नहीं करेंगे. अब देखना है के ये कहाँ विखंडित होते है.''

निकट ही जोत्पुरा गांव के एक किसान रामप्रसाद कहते है,“ मेरे खेत में इस धुएं के बाद कहीं कहीं काली परतें देखी गईं. टमाटर के पौधे की पत्तियों पर कालापन देखा गया. न जाने आगे खेती में कितना नुक़सान होगा.”

ऐसी ही शिकायत वाटिका गांव के किसानों को है. बहुत से लोग कहते हैं कि उनकी आँखों में जलन है, गले में ख़राश और सांस लेने में भी तकलीफ हो रही है.

'सरकार नज़र रखे है'

जयपुर के ज़िला कलेक्टर कुलदीप रांका कहते हैं, “ किसी बड़े नुकसान की अभी शिकायत नहीं मिली है. हम नजर रखे हुए है. पूरे इलाक़े में मोबाइल मेडिकल टीमें घूम रही हैं और प्रदूषण का पैमाना नापने के लिए चार केंद्र स्थापित किए गए है.”

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस धुएं में कार्बन है जो ख़तरनाक है और दमे के मरीज़ हैं, उन्हे बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है. साथ ही बच्चों और बुज़ुर्गो को भी अहतियात रखनी होगी.

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख वी एस सिंह ने बीबीसी को बताया की बोर्ड ने इसे काफ़ी गंभीरता से लिया है.

उनका कहना था, '' हमने विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर दी है जो नुकसान का जायज़ा लेगी और 15 नवम्बर तक अपनी रिपोर्ट दे देगी. समिति के रिपोर्ट काफी अहम होगी.''

तेल की डिपो में ये आग गत गुरुवार को लगी थी. आग के कारणों का अब तक पता नहीं चला है. लेकिन केंद्र सरकार ने इसकी जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है जिसने जांच का काम शुरु कर दिया है.

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