'सीआईए कर्मचारी अपहरण के दोषी'

इटली की अदालत ने 23 अमरीकियों को एक मौलवी के अपहरण के मामले में दोषी बताया
Image caption अदालत ने सीआईए के तत्कालीन प्रमुख रॉबर्ट लेडी को आठ साल जेल की सज़ा सुनाई

इटली की एक अदालत ने 23 अमरीकी कर्मचारियों को वर्ष 2003 में मिलान से एक मौलवी को अगवा किए जाने के मामले में दोषी पाया है.

इन 23 कर्मचारियों में से ज़्यादातर का संबंध अमरीकी गुप्तचर संस्था सीआईए से है. इस मामले में इटली के दो एजेंटों को भी दोषी पाया गया है.

मौलवी अबू उमर का कहना है कि उन्हें गुप्त तरीके से मिस्र ले जाया गया था जहाँ उनका कथित तौर पर उत्पीड़न किया गया.

अदालत ने मिलान में सीआईए के तत्कालीन प्रमुख रॉबर्ट लेडी को आठ साल जेल की सज़ा सुनाई जबकि अन्य को तीन से लेकर पाँच साल तक की सज़ा सुनाई. हालाँकि मुकदमे की सुनवाई के वक्त कोई भी अमरीकी मौजूद नहीं था.

ये मुक़दमा अपनी तरह का पहला ही मामला है जिसमें अवैध तरीके से एक व्यक्ति को दूसरे देश ले जाया गया.

दरअसल ये वो तरीका है जिसमें संदिग्ध चरमपंथियों को एक देश में पकड़ा जाता है और बिना किसी न्यायिक कार्यवाही के दूसरे देश ले जाया जाता है.

विशेष रूप से 11 सितंबर को अमरीका पर हुए हमले के बाद बुश प्रशासन ने व्यापक स्तर पर इस तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया.

आलोचना

आलोचक अमरीकी प्रशासन और सीआईए पर इस तरह के आरोप लगाते रहे हैं कि चरमपंथी गतिविधियों में शामिल कथित संदिग्धों को प्रताड़ित करने के लिए तीसरे देशों का इस्तेमाल किया गया. हालाँकि अमरीकी अधिकारी लगातार इसका खंडन करते रहे हैं.

जैसे जैसे संदिग्धों को प्रताड़ित करने के लिए दूसरे देशों में ले जाने की रिपोर्टों में वृद्धि हुई, अमरीका और कई यूरोपीय सहयोगियों के बीच तनाव भी बढ़ने लगा.

हालाँकि इन कार्रवाइयों के बारे में दूसरे देशों को कितना पता था या वो इसमें कितना सहयोग देते थे या फिर अमरीकी प्रशासन ये कार्रवाइयाँ कितने व्यापक तौर पर करता था, इन बातों को लेकर विवाद है.

इटली में चला ये मुक़दमा अमरीका और इटली के संबंधों में काँटे के तरह तो है ही, साथ ही इटली की सरकारों के लिए भी शर्मनाक रहा है.

बराक ओबामा जब राष्ट्रपति बने थे तब उन्होंने वादा किया था कि अमरीकी बंदियों को लेकर नीति में बदलाव किया जाएगा, लेकिन आलोचकों का कहना है कि ऐसे क़दम उठाने में ओबामा बहुत समय ले रहे हैं.

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