अमरीकी दूतावास पर क़ब्ज़े की वर्षगाँठ

  • 4 नवंबर 2009
तेहरान में अमरीका विरोधी रैली
Image caption अमरीका विरोधी रैली के समय ही अलग स्थान पर सरकार विरोधी रैली का भी आयोजन किया गया.

ईरान में अमरीकी दूतावास पर कब्ज़े की तीसवीं वर्षगांठ पर एक तरफ़ तो सरकार समर्थित रैली का आयोजन किया गया दूसरी तरफ़ विपक्षी कार्यकर्ताओं ने भी एक रैली निकाली जिस पर पुलिस ने आंसू गैस का प्रयोग किया है.

ईरान के सरकारी टेलीविज़न चैनल का कहना है कि सुरक्षाबलों ने तेहरान में विपक्षी समर्थकों के एक प्रदर्शन को तितर-बितर कर दिया है और कई लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है.

ये प्रदर्शन ठीक उसी समय हो रहे थे जब तेहरान में ईरानी इस्लामी विद्रोह के समय अमरीकी दूतावास पर कब्ज़ा करने की तीसवीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक सरकारी रैली हो रही थी.

इस रैली में हज़ारों लोगों ने हिस्सा लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विरोधियों के प्रदर्शन में जून में हुए राष्ट्रपति चुनाव में महमूद अहमदीनेजाद को चुनौती देनेवाले एक प्रत्याशी मेहदी करूबी भी शामिल थे.

सरकार समर्थित रैली में प्रदर्शनकारियों ने – अमरीका मुर्दाबाद, इसराइल मुर्दाबाद के नारे लगाए तो इस रैली से कुछ ही दूर रैली में विपक्षी उम्मीदवारों ने – तानाशाही मुर्दाबाद के नारे लगाए.

ईरान सरकार की विरोधी रैली में एक समय प्रदर्शनकारियों ने ये नारे भी लगाए – "ओबामा – या तो आप उनके साथ हैं या फिर हमारे साथ रहें."

यह सब इस अवसर पर हुआ है जब ईरान में अमरीकी दूतावास पर तीस वर्ष पहले आज ही के दिन क़ब्ज़ा कर लिया गया था. नवंबर 1979 में किए गए इस क़ब्ज़े के दौरान अमरीका के 52 कूटनीतिक कर्मचारियों को भी हिरासत में ले लिया गया था. उन कर्मचारियों को ईरान के क्रांतिकारी छात्रों ने इस्लामी क्रांति के समर्थन में 444 दिन तक अपनी हिरासत में रखने के बाद रिहा किया था.

इस रैली से क़रीब डेढ़ किलोमीटर दूर हफ़्ते तीर चौराहे पर एक और रैली हो रही थी जिसमें विपक्षी नेताओं के समर्थकों ने हिस्सा लिया. ख़ुद को सुधारवादी कहने वाले कार्यकर्ताओं ने भी उसी स्थान पर आज एक रैली आयोजित करने का आहवान किया था जहाँ तीस वर्ष पहले अमरीकी दूतावास हुआ करता था.

प्रतिबंधों का डर नहीं

रिवॉल्यूशनरी गॉर्ड ने विपक्षी कार्यकर्ताओं को ऐसी रैली नहीं आयोजित करने की चेतावनी जारी की थी. दंगा विरोधी पुलिस और सरकार समर्थित सुरक्षा बलों की भारी तादाद केंद्रीय तेहरान में तैनात की गई थी.

सरकार समर्थक एक नेता ग़ुलाम अली हदाद आदिल ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का कोई असर नहीं पड़ने वाला है, "हमें प्रतिबंधों से डराने की कोशिश ना की जाए. हमारा राष्ट्र क़ुर्बानियाँ देने के लिए तैयार है. पिछले तीस वर्षों से हमारे देश पर प्रतिबंध लगा रहे हैं और इनके बावजूद हम प्रगति ही कर रहे हैं."

"हमारा देश अपने पैरों पर खड़ा होगा. हमें प्रतिबंधों के ज़रिए चलाए जाने वाले इस नरम युद्ध से डराने की कोशिश ना की जाए."

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों में आग लगाई और एक बस पर भी हमला किया. दो पुलिसकर्मियों को चोटें भी आई हैं.

अधिकारियों ने विदेशी समाचार माध्यमों पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं इसलिए तेहरान से मिलने वाली ख़बरों की पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है.

ईरान में अमरीकी दूतावास पर क़ब्ज़ा किए जाने के तीन दशक होने के अवसर पर अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक वक्तव्य जारी करके ईरान से आग्रह किया है कि वह संदेह, अविश्वास और टकराव के इस मौहाल से आगे बढ़े जो तीस वर्ष पहले हुई घटना के बाद से व्याप्त रहा है.

बराक ओबामा के इस वक्तव्य में कहा गया है कि ईरान को कोई ना कोई ठोस रास्ता चुनना होगा, "अमरीका तीस वर्षों तक यह सुनता आया है कि ईरान सरकार किन-किन चीज़ों के ख़िलाफ़ है लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इस तरह की सोच का भविष्य क्या हो सकता है."