दीवार टूटने की बीसवीं बरसी

बर्लिन
Image caption उस दिन लोगों में गजब का उत्साह था

जर्मनी में बर्लिन की दीवार गिराए जाने की 20वीं बरसी मनाने की तैयारी की जा रही है.

उस दीवार के गिरने की बरसी जिसने बर्लिन शहर को लगभग तीन दशकों तक दो हिस्सों में बाँट कर रखा और जिसके अंत को जर्मनी के एकीकरण और शीत युद्घ की समाप्ति की शुरुआत मान सकते हैं.

आज़ादी के संदेश पेंट किये हुए गत्ते की बड़ी-बड़ी दीवारों को ठीक उन रास्तों पर लगाया गया है जहाँ कभी बर्लिन की दीवार हुआ करती थी.

गत्ते की इन दीवारों को सोमवार को होने वाले समारोह में गिराया जाएगा. वर्ष 1989 में पूर्वी यूरोप के कई देशों की कम्युनिस्ट तंत्रों का अंत हो गया था.

लोग चिल्ला रहे थे, "दीवार को तोड़ डालो."

और इसी बीच लोगों के उल्लास, आंसुओं में डूबे हुए चेहरों के बीच हज़ारों पूर्वी बर्लिन वासी दशकों से खड़ी अभेद्य दीवार को गिराने को बढ़ गए.

यह सब उस समय एक करिश्मे की तरह लग रहा था.

उस दिन शाम सात बजे के कुछ पहले, अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस की समाप्ति पर पोलित ब्यूरो के प्रवक्ता गुएंटर शबोव्सकी ने ब्यान दिया था कि पूर्वी जर्मनी के नागरिकों को अब पश्चिम जर्मनी जाने की इजाज़त दी जाएगी.

जब उनसे पूछा गया कि यह आदेश कब से लागू होगा उन्होनें कहा- जहाँ तक मैं जानता हूँ इसी वक़्त से.

योजना

हालांकि योजना यह थी कि यह आदेश दूसरे दिन से लागू होगा और इसमें वीज़ा का एक सिस्टम भी स्थापित किया जाएगा.

Image caption दीवार टूटने की 20वीं बरसी पर कई कार्यक्रम हो रहे हैं

लेकिन समाचार एजेंसियों ने और पश्चिम जर्मन टीवी ने घोषणा कर दी थी की बॉर्डर अब खुला हुआ है. पश्चिम जर्मन टीवी पूर्वी क्षेत्र में खूब देखी जाती थी.

मिनटों में बॉर्डर चेक प्वांइट्स पर भीड़ जमा हो गयी लेकिन वहाँ मौजूद संतरियों और अधिकारियों को इस मामले में किसी साफ़ निर्देश का पता नहीं था.

फ़िलहाल जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल कहती हैं कि यह वह दिन था जिसने बहुत सारे लोगों की ज़िंदगियाँ बदल दी और उनकी भी.

उन्होनें मानवधिकार संस्थाओं और चर्चों का शुक्रिया अदा किया कि उन्होनें बड़े विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जिससे लोगों के भीतर बढ़ रहा असंतोष उजागर हुआ.

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