एक दीवार टूटी, दुनिया बदल गई

  • 9 नवंबर 2009
बर्लिन दीवार
Image caption बर्लिन की इस दीवार ने ना केवल बर्लिन बल्कि जर्मनी और यूरोप को बाँट रखा था

बर्लिन दीवार टूटने की ऐतिहासिक घटना की 20वीं वर्षगांठ पर आज बर्लिन में समारोह हो रहे हैं.

समारोह की शुरूआत पूर्वी बर्लिन के पूर्व में स्थित गेट्सीमेने चर्च में एक प्रार्थनासभा से से हुई जो 1989 में हुए विरोध प्रदर्शनों के केंद्रों में से एक था.

इन प्रदर्शनों के बाद नौ नवंबर 1989 को बर्लिन दीवार को ढहा दिया गया और अंततः इसकी परिणति साम्यवाद के पतन, पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी के एकीकरण और शीतयुद्ध की समाप्ति से हुई.

बर्लिन दीवार ढहाए जाने की 20वीं वर्षगांठ पर होनेवाले समारोह में जर्मन चांसलर एंगेला मैरकल और पूर्व सोवियत नेता मिखाइल गोर्बाचेव एक साथ 1989 में पूर्वी जर्मनी की ओर से सीमा पर खोले गए पहले रास्ते से दूसरी तरफ़ जाएँगे.

समारोह में कई देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं और वे भी पुरानी सीमा को पार करते समय एंगेला मैरकल और मिखाइल गोर्बाचेव का साथ देंगे.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोज़ी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन, अमरीकी विदेश मंत्रि हिलेरी क्लिंटन के अतिरिक्त पोलैंड के पूर्व राष्ट्रपति लेक वालेसा और हंगरी के पूर्व प्रधानमंत्री मिक्लोस नेमेथ को भी समारोह में आमंत्रित किया गया है.

लेक वालेसा ने अपने देश में साम्यवादियों का विरोध करनेवाले सॉलिडेरिटी ट्रेड यूनियन की अगुआई किया था जबकि मिक्लोस हेमेथ ने सबसे पहले अपने देश की सीमा खोल दी थी जिससे कि पूर्वी जर्मनी के निवासियों ने पश्चिम जर्मनी भागना शुरू कर दिया.

इस दिन की याद में जर्मन युवाओं ने पुरानी दीवार के रास्ते पर लकड़ियों से बने खाके लगाए हैं जिनपर स्वतंत्रता के संदेश लिखे हैं और उन्हें शाम को ये दर्शाने के लिए गिराया जाएगा कि कैसे उस समय में पूरे पूर्वी यूरोप में एक-एक कर साम्यवादी सरकारें गिरती गईं.

मुख्य समारोह बर्लिन के ब्रैंडेनबर्ग गेट पर हो रहा है जो 1990 में जर्मनी के एकीकरण का प्रतीक समझा जाता है.

बर्लिन दीवार

Image caption बर्लिन की दीवार के एक हिस्से पर बड़ी संख्या में लोग जुटे और उस दिन को याद किया

बर्लिन दीवार 13 अगस्त 1961 को बनाई गई थी.

पूर्वी जर्मनी के साम्यवादी शासक 155 किलोमीटर लंबी बर्लिन की दीवार से तत्कालीन पूर्वी बर्लिन से पश्चिम जर्मनी के रास्ते को बंद करना चाहते था जिससे कि पूर्वी जर्मनी के लोगों का पूँजीवादी पश्चिम जर्मनी में पलायन रोका जा सके.

मगर इस दीवार को पार करने की कोशिशें होती रहीं और एक अनुमान है कि बर्लिन दीवार को पार कर पश्चिम जर्मनी में भागने का प्रयास करते हुए 100 से अधिक लोगों को जान गँवानी पड़ी थी.

1989 के अगस्त-सितंबर माह में पूर्वी जर्मनी में साम्यवादियों ने पकड़ ढीली करनी शुरू की जिसके बाद दसियों हज़ार लोग शरण लेने पश्चिम जर्मनी भागने लगे.

फिर सात अक्तूबर को सोवियत संघ के नेता मिखाइल गोर्बाचेव ने पूर्वी जर्मनी का दौरा करते समय अप्रत्यक्ष रूप से सुधार की बात छेड़ दी.

इसके बाद पूर्वी जर्मनी में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए और 18 अक्तूबर को एरिक होनेकर को पूर्वी जर्मनी के नेता के पद से हटना पड़ा.

मगर सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी रहे और चार नवंबर को बर्लिन में एक बड़ी रैली हुई जिसमें 10 लाख लोग जुटे.

अंततः नौ नवंबर को पूर्वी जर्मनी की सरकार ने अपने निवासियों पर पश्चिम जर्मनी जाने पर लगी पाबंदी हटा ली जिसके बाद अचानक ही बर्लिन की दीवार को तोड़ दिया गया.

नाटकीय अंत

बर्लिन दीवार के टूटने की घटना अत्यंत नाटकीय रही और समझा जाता है कि इसके लिए तत्कालीन पूर्वी जर्मनी के एक अधिकारी गुंटा शबोव्स्की ज़िम्मेदार रहे.

पहले तो इस अधिकारी ने ग़लती से एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में सरकार की प्रस्तावित योजना का ब्यौरा दे डाला जिसका सीधा प्रसारण हो रहा था.

इसके बाद इस अधिकारी से जब ये पूछा गया कि ये योजना कब लागू होगी तो उसने दोबारा ग़लती करते हुए ये कह डाला कि योजना तत्काल प्रभाव से लागू हो रही है.

गुंटा शबोव्स्की ने बीबीसी के साथ एक बातचीत में माना कि उस समय पार्टी नेता एगोन क्रेंज़ के साथ कुछ संवादहीनता की स्थिति आ गई थी जिससे ग़लती हुई.

लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी ग़लती पर अफ़सोस नहीं है क्योंकि अंततः इसके कारण दोनों जर्मनियों का शांतिपूर्वक एकीकरण हो गया.

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