धनी देशों पर मालदीव का प्रहार

मोहम्मेद नशीद
Image caption मोहम्मद नशीद का कहना है कि धनी देश अपने संकल्प को पूरा करने में नाकाम रहे हैं

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दुनिया के धनी देशों की तीखी आलोचना की है.

उन्होंने कहा कि धनी देश जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित देशों की सहायता के लिए इतनी कम राशि दे रहे हैं कि ऐसा लगता है मानो कोई किसी भूकंप प्रभावित क्षेत्र में सहायता के लिए हाथ में झाड़ू लेकर चला आया हो.

मोहम्मद नशीद ने मालदीव की राजधानी माले में जलवायु परिवर्तन पर विचार के लिए हो रहे दो दिवसीय सम्मेलन में जिसमें 11 देशों के अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं.

मालदीव सरकार कहती रही है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से उनके देश के सामने बहुत बड़ा ख़तरा है.

मालदीव समुद्र के जलस्तर से दो मीटर 10 सेंटीमीटर या सात फ़ीट ऊपर है और ऐसी आशंका जताई जाती है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से इस शताब्दी के अंत तक सारे का सारा देश पानी के भीतर समा सकता है.

आलोचना

मालदीव के राष्ट्रपति ने धनी देशों पर आरोप लगाया कि इन देशों ने धरती के तापमान में दो डिग्री सेल्सियस से अधिक की वृद्धि नहीं होने देने का संकल्प लिया था लेकिन वे इसे प्राप्त करने के लिए क़दम उठाने में नाकाम रहे.

मोहम्मद नशीद ने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कार्बन उत्सर्जन की एक सीमा निर्धारित करना ज़रूरी था लेकिन धनी देशों ने इसे मानने से इनकार कर दिया.

मोहम्मद नशीद ने कहा,"दो प्रतिशत तापमान बढ़ने से भी ग्रीनलैंड पिघल जाएगा और हमारा देश मृत्युशय्या पर पहुँच जाएगा, मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता."

मालदीव चाहता है कि माले सम्मेलन में जुटे देश अपने तरीक़े से प्रदूषण को दूर करने और कार्बन उत्सर्जन से निबटने का उदाहरण प्रस्तुत करें.

मालदीव के राष्ट्रपति ने कहा है कि इस समूह विकासशील देशों के इस समूह के साझा प्रयास से अगले महीने कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर होनेवाले शिखर सम्मेलन की दिशा बदल सकती है क्योंकि इन देशों के कारण धनी देशों पर नैतिक दबाव बनेगा.

ये 10 देश अलग-अलग तरह से जलवायु परिवर्तन का दंश झेल रहे हैं. इनमें कुछ ऐसे अफ़्रीकी देश हैं जहाँ रेगिस्तान बढ़ रहे हैं, कुछ ऐसे पर्वतीय देश हैं जहाँ ग्लेशियर पिघल रहे हैं, कुछ ऐसे देश भी हैं जहाँ बाढ़ और चक्रवात आते हैं और फिर मालदीव जैसे द्वीप भी हैं जिन्हें समुद्र के जलस्तर के बढ़ने से ख़तरा है.

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