रोका गया अमरीकी जहाज़

Image caption भारत ने अमरीकी जहाज़ के अलंग अड्डे पर तोड़े जाने पर रोक लगाई

भारत ने अमरीका के एक पूर्व नौसैनिक जहाज़ के प्रवेश पर रोक लगा दी है.

ये जहाज़ भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात के अलंग पोर्ट पर जा रहा था लेकिन पर्यावरण और प्रदूषण की चिंता के कारण इसे रोक दिया गया.

भारत के पर्यावरण और वन मंत्रालय का कहना है कि उसने 'प्लेटिनम 2' नामक इस जहाज़ की जांच की और उस पर ज़हरीला पदार्थ पाया.

मंत्रालय को ये चिंता भी थी कि जहाज़ को फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के साथ भारत लाया गया है.

ये जहाज़ पिछले महीने भारतीय जल सीमा में पहुंचा था लेकिन उसे जांच पूरी हो जाने तक गोदी में खड़ा करने की अनुमति नहीं मिली.

एक दल ने 19 और 20 अक्तूबर को जहाज़ की जांच की और 26 अक्तूबर को अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी.

पर्यावरण मंत्रालय ने गुजरात मेरिटाइम बोर्ड को अपनी टिप्पणी लिख कर भेजी कि इस जहाज़ को तोड़े जाने के लिए गोदी में खड़े होने की इजाज़त देना ठीक नहीं होगा.

पर्यावरणवादी संगठनों के समूह इंडियन प्लेटफ़ॉर्म ऑन शिप ब्रेकिंग के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में भारत सरकार के इस फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा, “प्लेटिनम 2 के मामले में एहतियाती सिद्धांतों का पालन किया गया जो कि 'ब्लू लेडी' जहाज़ के मामले में नहीं किया गया था”.

जहाज़ों का क़ब्रिस्तान

'प्लेटिनम 2' को गुजरात के अलंग अड्डे पहुंचना था जहां जहाज़ तोड़े जाते हैं. गुजरात मेरिटाइम बोर्ड इस काम के लिए इस अड्डे का पट्टे पर देता है.

ये एशिया का सबसे बड़ा जहाज़ तोड़ने वाला अड्डा है और ‘जहाज़ों के क़ब्रिस्तान’ के नाम से जाना जाता है. दुनिया भर से हज़ारों पुराने जहाज़ यहां तोड़े जाने के लिए लाए जाते हैं.

यहां काम करने वाले हाथों से और मामूली उपकरणों की सहायता से इन विशाल जहाज़ों को तोड़ने का काम करते हैं. लेकिन पिछले कई सालों से इसे बंद किए जाने का अभियान चल रहा है. अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे मज़दूरों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

पर्यावरणवादी संगठनों के समूह इंडियन प्लेटफ़ॉर्म ऑन शिप ब्रेकिंग के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण ने कहा, “यह उद्योग विनियमित नहीं है. ज़हरीले पदार्थों को लेकर जो क़ानून हैं वो लागू नहीं होते और इस उद्योग में काम करने वाले मज़दूरों के स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा जाता”.

एस्बेस्टॉस का ज़हर

अलंग अड्डे को लेकर पर्यावरण चिंताएं बहुत लंबे समय से रही हैं.

सन 2006 में 'ग्रीनपीस' और अन्य पर्यावरण संगठनों के लम्बे अभियान के बाद फ़्रांसीसी सरकार को अपना विमान वाहक जहाज़ 'क्लिमेन्सू' वापस बुलाना पड़ा था. पर्यावरण संगठनों का कहना था कि इस जहाज़ पर एस्बेस्टॉस समेत भारी मात्रा में ज़हरीले रसायन मौजूद थे.

तीन साल पहले भारत सरकार ने एक रिपोर्ट तैयार करवाई थी जिसमें कहा गया था कि अलंग जहाज़ी कबाड़ अड्डे में काम करने वाले छ में से एक मज़दूर में एस्बेस्टॉस के ज़हर का असर देखा गया.

रिपोर्ट का कहना था कि कई मज़दूरों में एस्बेस्टॉसिस बीमारी के आरंभिक लक्षण पाए गए. ये फेफड़ों की एक लाइलाज बीमारी है.

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