प्रथम विश्व युद्ध के सैनिकों की याद

सैनिकों की याद
Image caption दुनिया भर में प्रथम विश्व युद्ध के सैनिकों को याद किया गया

दुनिया भर में 1918 में प्रथम विश्व युद्घ के दौरान हुए युद्ध विराम दिवस को याद किया गया.

आर्लिंगटन के राष्ट्रीय कब्रिस्तान में दिए गए अपने भाषण में अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि सशस्त्र सेनाओं की सेवाओं और बलिदान का मूल्य चुकाया नहीं जा सकता.

ओबामा ने आर्लिंगटन कब्रिस्तान में अज्ञात सैनिकों के सम्मान में बने एक स्मारक का अनावरण भी किया. युद्ध के दौरान मारे गए ज़्यादातर अमरीकी सैनिकों को इसी जगह दफ़नाया गया है.

ओबामा ने पूर्व और वर्तमान सैनिकों की असाधारण वीरता और सेवाओं की प्रशंसा की.

उन्होंने कहा, ‘सैनिकों और उनके परिवारों की सेवाओं और बलिदान का मूल्य किसी पुरस्कार, सम्मान या उत्सव से नहीं चुकाया जा सकता.’

उधर पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति निकोलस सर्कोज़ी और जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने प्रथम विश्व युद्ध के अज्ञात सैनिकों की स्मृति में पेरिस में बने स्मारक पर मोमबत्ती जलाई.

दोनों नेताओं की उपस्थिति में फ्रांस और जर्मनी के सैनिकों ने मौन रखकर विश्व युद्ध के सैनिकों को श्रद्धांजलि दी.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि दोनों नेता स्मारक के किनारे खड़े हुए और उसी समय दोनों देशों के झंडे हवा में लहराए गए, जो कि मैत्री का एक सशक्त और मर्मस्पर्शी प्रतीक था.

औपचारिक समारोह के बाद सरकोज़ी ने एंगेला मर्केल से कहा, ‘इस ग्यारह नवंबर के मौके पर आपकी उपस्थिति हमारी असाधारण दोस्ती का संकेत है और हरेक फ्रांसीसी नागरिक इसके महत्व को जानता है.’

एंगेला मर्केल ने कहा उनका देश फ्रांस की ओर से दिये गए दोस्ती के उपहार को स्वीकार करता है और उन्होंने दोनों देशों को एक साथ लाने के लिए इतिहास को धन्यवाद दिया.

संबंधित समाचार