रूस में आर्थिक सुधारों पर बल

  • 12 नवंबर 2009
दिमित्रि मेदवदेव
Image caption रूस के राष्ट्रपति ने देश की अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया है.

रूस के राष्ट्रपति दिमित्रि मेदवदेव ने राष्ट्र के नाम अपने वार्षिक संबोधन में देश की अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया है.

उन्होने कहा कि सोवियत युग का मॉडल अब काम नहीं कर सकता और रूस तभी नई दुनिया की चुनौतियों का सामना कर सकेगा जब तीव्र गति से आधुनिकीकरण हो.

रूस के राष्ट्रपति ने कहा कि तेल और गैस पर आधारित अर्थव्यवस्था को कारगर बनाने के लिए उच्च टेक्नोलॉजी में निवेश करना होगा. वो सरकारी उपक्रम जो ठीक से काम नहीं करते उनमें बुनियादी बदलाव करने पड़ेगे और जवाबदेही और पारदर्शिता के मामलों पर भी ग़ौर करना होगा.

राष्ट्रपति मेदवदेव ने कहा, “हम कच्चे माल पर आधारित अर्थव्यवस्था की जगह चुस्त अर्थव्यवस्था बनाएँगे जिसमें ऐसे माल और टेक्नोलॉजी का उत्पादन किया जाएगा जो लोगों के लिए उपयोगी हों.”

उन्होंने कहा, “एक पुरातन समाज के बजाए जिसमें नेता विचार करते हैं और सबके लिए फ़ैसले करते हैं हम रूस को बुद्धिमान, स्वतंत्र और ज़िम्मेदार लोगों का समाज बनाएंगे.”

भ्रष्टाचार

पिछले साल अपने सालाना अभिभाषण में राष्ट्रपति मेदवदेव ने पोलैंड के निकट मिसाइलें लगाने की घोषणा की थी. लेकिन इस बार उनका ध्यान रूस को बदलने और उसे एक आधुनिक और खुला देश बनाने पर रहा.

उन्होंने कहा कि दस लाख से अधिक रूसियों के बेरोज़गार होने का ख़तरा है और कई सामाजिक विषयों पर भी चर्चा करने की ज़रूरत है.

श्री मेदवदेव ने कहा, "हम अब और इंतज़ार नहीं कर सकते. हमें अपने समूचे औद्योगिक आधार का आधुनिकीकरण करना होगा. आधुनिक दुनिया में हमारे देश की उत्तरजीविता इसी पर निर्भर करेगी."

रूस की सरकार को अधिक पारदर्शी होने की ज़रूरत है और भ्रष्टाचार दंडित किया जाना चाहिए. उन्होने कहा कि बड़ी बड़ी सरकारी कम्पनियों का कोई भविष्य नहीं है.

उन्होने कहा,“जो उपक्रम ठीक से काम नहीं कर रहे उन्हे अपने को दिवालिया घोषित कर देना चाहिए या फिर बाज़ार से बाहर हो जाना चाहिए. हम उनकी चिरकाल तक रक्षा नहीं करेंगे.”

राष्ट्रपति मेदवदेव ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने का वादा किया लेकिन साथ ही ये चेतावनी भी दी कि 'लोकतांत्रिक नारे' लगाकर राष्ट्र की स्थिरता को भंग करने के प्रयास नहीं करने दिए जाएंगे.

उन्होने कहा, "आज़ादी का मतलब है ज़िम्मेदारी और मैं आशा करता हूं कि हर रूसी नागरिक इसे समझता है. उन्होने एक व्यावहारिक विदेश नीति का वादा किया जो रूसियों के जीवन स्तर में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित कर सके."

रूस के राष्ट्रपति ने देश की मौजूदा स्थिति का चिंताजनक आकलन प्रस्तुत किया और उसे बदलने की मांग की. उनके भाषण में परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री व्लादीमीर पुतिन की आलोचना भी थी.

राष्ट्रपति अपने आपको पूतिन की छाया से अलग एक स्वतंत्र व्यक्ति प्रमाणित करना चाहते हैं. लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या वो अपने वादों के अनुरूप देश में राजनीतिक और आर्थिक सुधार ला सकेंगे.

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