विश्व में सत्ता का केंद्र एशिया की ओर

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ईरान के विदेश मंत्री मनुचहर मुत्तक़ी ने कहा है कि दुनिया में आर्थिक और राजनीतिक सत्ता का केंद्र पश्चिम से हटकर पूरब की ओर जा रहा है.

दो दिनों की भारत यात्रा पर आए मनुचहर ने अपनी यात्रा के अंतिम दिन मंगलवार को दिल्ली में एक सेमिनार में कहा कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने आर्थिक और राजनीतिक संगठन बदलती दुनिया की समस्याओं से निपटने में असमर्थ है.

पिछले साल के आर्थिक संकट और जी-20 के गठन ने स्पष्ट तौर पर ये संकेत दिए हैं.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का मौजूदा ढांचा अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और सुरक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को संभालने मे विफल है.

लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि एशियाई देशों के बीच समन्वय की कमी से इन देशों के भविष्य को काफ़ी ख़तरा है.

पाइप लाइन

ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि भारत के लिए दरवाज़े खुले हैं.

दूसरे विश्व युद्ध के बाद बने आर्थिक और राजनीतिक संगठन बदलती दुनिया की समस्याओं से निपटने में असमर्थ है.

ईरानी विदेश मंत्री

उनके मुताबिक़ ईरान ने लगभग 100 किलोमीटर तक पाइपलाइन बिछा ली है और पाकिस्तान ने भी अपने यहाँ काम शुरू कर दिया है. उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में भारत भी इसमें ज़रूर शामिल होगा.

अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद अमरीकी सैनिकों के बारे में उन्होंने कहा संयुक्त राष्ट्र के एक पूर्व उपमहासचिव जो रूस के नागरिक थे, उनके बयान का हवाला दिया.

उन्होंने कहा कि पूर्व उप महासचिव ने कहा था कि रूस ने ब्रिटेन से कुछ नही सीखा और अमरीका ने रूस से कुछ नही सीखा.

मुत्तकी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में बुश की नीति असफल हो गई है और केवल सैनिक तरीक़ों से इस समस्या का समाधान नही हो सकता.

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग और समन्वय पर आधारित एक नई नीति को अफ़ग़ानिस्तान में लागू किया जाए.

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