पर्यावरण पर नई सहमति के संकेत

हू जिंताओ और बराक ओबामा
Image caption बराक ओबामा राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार चीन की यात्रा पर हैं

चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ से मुलाक़ात के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अगले महीने होने वाले पर्यावरण सम्मेलन के लिए दोनों देशों के बीच नई सहमति के संकेत दिए हैं.

बराक ओबामा ने कहा है कि दोनों देश कोपेनहेगन में कोई राजनीतिक या आधे-अधूरे समझौते के पक्ष में नहीं हैं बल्कि दोनों देश चाहते हैं कि वहाँ एक व्यापक समझौता हो.

अब तक संयुक्त राष्ट्र और डेनमार्क की ओर से कहा जाता रहा है कि कोपेनहेगन में क़ानूनी रुप से बाध्यकारी किसी समझौते की संभावना नहीं है लेकिन एक राजनीतिक सहमति बन सकती है.

बराक ओबामा और हू जिंताओ ने बीजिंग में हुई मुलाक़ात के बाद संयुक्त पत्रकारवार्ता में जो कुछ कहा है उससे संकेत मिलते हैं कि दोनों देशों ने किसी व्यापक समझौते की पहल की ओर क़दम बढ़ाए हैं.

हालांकि इसके विवरण अभी नहीं मिले हैं.

दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने कहा है कि इसके अलावा आर्थिक संकट से उबरने के उपाय और परमाणु अप्रसार जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति बनी है.

मानवाधिकार

अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा ने पत्रकारवार्ता में कहा कि उन्होंने चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ के सामने मानवाधिकार का मुद्दा भी रखा है.

उनका कहना था कि अमरीका की राय है कि मानवाधिकार पूरे विश्व में सभी के लिए समान होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि चीन में भी अल्पसंख्यकों को सामाजिक और धार्मिक स्वतंत्रता होनी चाहिए.

इससे पहले हू जिंताओ ने कहा कि उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति के समक्ष सभी देशों की संप्रभुता के सम्मान का मुद्दा उठाया है.

परमाणु अप्रसार की दिशा में दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने की महत्ता को रेखांकित करते हुए बराक ओबामा ने कहा कि अमरीका चाहता है कि चीन उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर छह देशों की बैठक को यथाशीध्र आयोजित करने की पहल करे.

बराक ओबामा ने कहा कि उन्होंने चीन से अनुरोध किया है कि वह ईरान पर यह दबाव बनाए कि वह साबित करे कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यों के लिए है.

आर्थिक मंदी से उबरने के मुद्दे पर दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने आर्थिक क्षेत्र में अपने मतभेद दूर करके साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दिखाई.

बराक ओबामा ने कहा, "हम चाहते हैं कि दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़े. हम नहीं चाहते कि किसी एक का विकास किसी दूसरे देश की क़ीमत पर हो."

हू जिंताओ ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहमति बनी है कि वे आर्थिक संरक्षणवाद को ख़ारिज करते हैं.

उल्लेखनीय है कि आर्थिक संरक्षणवाद पर चीन चिंता ज़ाहिर करता रहा है.

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