पाक: 'लोकतंत्र में कम, सेना में भरोसा ज़्य़ादा'

  • 22 नवंबर 2009
पाकिस्तानी युवा (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption ब्रिटिश काउंसिल के सर्वेक्षण में 1226 पाकिस्तानी युवाओं ने भाग लिया

ब्रितानी संस्था ब्रिटिश काउंसिल ने पाकिस्तान की अगली पीढ़ी पर जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि उसके सर्वेक्षण के मुताबिक 60 प्रतिशत पाकिस्तानी युवाओं को सेना पर भरोसा है जबकि केवल 33 प्रतिशत देश के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था के पक्षधर हैं.

‘द नेक्स्ट जेनरेशन’ के शीर्षक वाली ब्रिटिश काउंसिल की रिपोर्ट के लिए एसी नीलसन एजेंसी ने शोध और सर्वेक्षण किया जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों और वर्गों के 1226 युवाओं ने भाग लिया जिनकी उम्र 18 से 30 साल तक थी.

ब्रिटिश काउंसिल ब्रिटेन की सरकार द्वारा समर्थित एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो शिक्षा और सांस्कृतिक रिश्तों को बढ़ावा देने के क्षेत्रों में सक्रिय है.

धर्म पर आधारित शिक्षा

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस सर्वेक्षण के मुताबिक लगभग एक तिहाई युवाओं की शरिया क़ानून में आस्था है जबकि लगभग 50 प्रतिशत को धर्म पर आधारित शिक्षा पर भरोसा है.

कराची के फ़ेड्रल उर्दू विश्वविद्यालय के डाक्टर तौसीफ़ अहमद ने बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव को बताया, " ये बात सही है की पकिस्तान की युवा पीढ़ी में इस तरह की बातें बढीं हैं. समाज में अमीर और ग़रीब, लड़के हो या लड़कियाँ, ज़्यादा युवा धर्म की तरफ़ झुक रहे हैं और मौजूदा हालात को देखते हुए ये सही नहीं है."

सरकार की भूमिका और ज़िम्मेदारी के बारे में डाक्टर तौसीफ़ अहमद का कहना था, "1970 और 1980 के दशकों में पाकिस्तान की सरकारों ने पढाई-लिखाई और रोज़-मर्रा की ज़िंदगी में धार्मिक तौर तरीकों, फ़ौज में भरोसे जैसे विषयों को बढ़ावा दिया. आज नतीजा आपके सामने है. आज पाकिस्तानी सरकार अपने ही नागरिकों से इन नीतियों के नतीजों के कारण निपटने में जुटी हुई है."

सर्वेक्षण में ये भी पाया गया कि लगभग 75 प्रतिशत युवाओं ने अपनी पहचान मुसलमान बताई जबकि 14 प्रतिशत ने अपनी मुख्य पहचान पाकिस्तानी नागरिक बताई. ये भी पाया गया कि केवल दस प्रतिशत को राष्ट्रीय या स्थानीय सरकारों, न्यायपालिका या फिर पुलिस पर भरोसा है.

डॉक्टर तौसीफ़ अहमद कहते हैं, "पाकिस्तान के सरकारी स्कूलों की हालत ख़राब है. ग़रीब लोग जिनकी संख्या ख़ासी है, अपने बच्चों को इन स्कूलों में भेजना इसलिए पसंद नहीं करते क्योंकि वे मानते हैं कि वहाँ तालीम मिलना मुमकिन नहीं हैं. अधिकतर युवा मदरसों में ही पढ़ाई करते हैं. सरकार की भी ऐसी कोई प्राथमिकता नहीं कि इस स्थिति में बदलाव लाया जाए. जिस नई शिक्षा प्रणाली की घोषणा हुई है उसमें मज़हबी तालीम के लिए खासी जगह रखी गई है."

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान की 18 करोड़ की वर्तमान जनसंख्या में से आधी 20 साल से कम उम्र की है जबकि 66 प्रतिशत लोग 30 साल से कम उम्र के हैं. अनुमान है कि वर्ष 2030 तक पाकिस्तान की जनसंख्या 26 करोड़ से ज़्यादा हो जाएगी.

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