विषैले दूध के मामले में दो को फांसी

Image caption चीन में पाउडर दूध में मिलावट करने के अपराध में दो लोगों को मृत्यु दंड

चीन में पाउडर दूध में मिलावट करने के अपराध में दो लोगों को मृत्यु दंड दिया गया है. इस दूध के सेवन से छह बच्चों की मौत हो गई थी और 3 लाख बच्चे बीमार पड़ गए थे.

जांच से पता चला था कि इस पाउडर दूध में मेलेमाइन नामका एक रसायन मिला था जिसका प्लास्टिक और उर्वरक बनाने में प्रयोग किया जाता है.

अदालत के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में झांग युजुन और गैंग जिनपिंग को मृत्य दंड दिया गया जबकि अन्य 19 लोगों को जेल की सज़ाएं दी गईं थीं.

चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार झांग युजुन को आम लोगों की सुरक्षा को ख़तरे में डालने और गैंग जिनपिंग को मेलेमाइन से विषाक्त पाउडर दूध सप्लाई करने के आरोप में सज़ा दी गई.

मिलीभगत

मेलेमाइन का प्रयोग प्लास्टिक और उर्वरक बनाने में किया जाता है. जब उसे खाद्य उत्पादों में मिलाया जाता है तो उसमें प्रोटीन की मात्रा बढ़ी हुई दिखाई देती है लेकिन इससे गुर्दे में पथरी हो सकती है यहां तक कि गुर्दा बेकार भी हो सकता है.

दूध के व्यापारियों और बिचौलियों ने यह विषाक्त पाउडर दूध बड़ी बड़ी डेरी कम्पनियों को बेचा लेकिन इन कम्पनियों ने दूध की शुद्धता या उसके पोषक तत्वों का परीक्षण नहीं किया.

'सान्लू' चीन की सबसे बड़ी पाउडर दूध विक्रेता कम्पनी थी लेकिन पिछले साल सितम्बर में इस कांड का पर्दाफ़ाश होने के बाद उसका दिवाला निकल गया.

ये भी पता चला कि 'सान्लू' को इस बात की जानकारी थी कि वह विषैला दूध बेच रही है लेकिन फिर भी उसने 900 टन पाउडर दूध बिकने दिया.

कम्पनी की भूतपूर्व अध्यक्ष तियान वेन्हुआ को इस साल जनवरी में आजीवन कारावास का दंड मिला. उन्होने नक़ली और निचले स्तर का पाउडर दूध बनाने और बेचने का दोष स्वीकार किया था.

जनता में आक्रोश

इस मामले के प्रकाश में आने के बाद चीनी जनता में बड़ा आक्रोश पैदा हुआ था. चार साल पहले भी इसी तरह के विषैले दूध का मामला सामने आया था जिसके सेवन से 13 शिशु मर गए थे.

संवाददाताओं का कहना है कि चीन को सारी दुनिया से अपना घटिया माल वापस लेना पड़ा और उसके उत्पादों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे.

दिसम्बर 2008 में सरकार ने इस दूध के निर्माण और वितरण से जुड़ी 22 कम्पनियों को हज़ारों प्रभावित परिवारों को 16 करोड़ 10 लाख डॉलर अदा करने के आदेश दिए.

कोई 200 परिवारों ने इस मुआवज़े को नाकाफ़ी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की लेकिन अभी तक उसपर कोई सुनवाई नहीं हुई है.

कुछ परिवारों के वकीलों का कहना है कि सरकार ने स्थानीय प्रशासन से कहा था कि वो संबंधित परिवारों के साथ मिलकर मुआवज़े की रक़म तय करें.

लेकिन एक वकील शू ज़ियॉंग का कहना है, "ये समस्या वास्तव में नियामन प्रणाली के कमज़ोर होने से पैदा हुई है. इस कोताही के लिए खाद्य निरीक्षण और जांच प्रशासन ज़िम्मेदार है."

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