यौन शोषण के मामले में चर्च 'बेपर्दा'

डबलिन के कई आर्चबिशप पर गंभीर आरोप
Image caption डबलिन के आर्चबिशप

आयरलैंड सरकार की एक रिपोर्ट में बच्चों के यौन शोषण के मामले में डबलिन के रोमन कैथोलिक चर्च की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चर्च ने अपने यहाँ हुए बच्चों के यौन शोषण के मामलों पर दशकों तक पर्दा डालने की कोशिश की.

ये भी आरोप है कि इन मामलों में चर्च ने अभियुक्त पादरियों से काफ़ी नरमी बरती और उनके ख़िलाफ़ कुछ नहीं किया गया. आयरलैंड सरकार ने अपनी जाँच में यह भी पाया कि बच्चों के यौन शोषण के मामले वर्ष 2004 तक चले.

सरकार ने यह भी जाँच कराई कि डबलिन के रोमन कैथोलिक चर्च के अधिकारियों ने कैसे बच्चों के यौन शोषण के अभियुक्त 46 पादरियों के ख़िलाफ़ जाँच की.

जांच में पाया गया है कि चर्च ने किस तरह अपनी देखरेख में रह रहे बच्चों की सुरक्षा के बजाय चर्च की प्रतिष्ठा का ख़्याल पहले रखा.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकारी अधिकारियों ने मामले को छिपाने कि कोशिश में चर्च की मदद की.

रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया ज़ाहिर करते हुए डबलिन के आर्चबिशप डायरमुइड मार्टिन ने कहा है कि "माफ़ी के कोई शब्द कभी भी काफी नहीं होंगे." उन्होंने सभी पीड़ितों के सामने अपना दुख प्रकट किया और उनके साथ जो हुआ, उसपर शर्मिंदगी ज़ाहिर की.

डबलिन के कैथोलिक चर्चों में 1975 से 2004 के बीच के यौन शोषण के आरोपों की जांच हुई.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चर्च के अधिकारियों ने इन बड़े मामलों के प्रकाश में आने के बाद आम लोगों की ग़ुस्से भरी प्रतिक्रिया को दरकिनार किया. जबकि होना ये चाहिए था कि यौन शोषण करनेवालों को अपना कुकर्म दोहराने से रोका जाए.

इस तरह के आरोपों को प्रशासनिक अधिकारियों के सामने लाने की जगह जिन पादरियों पर आरोप लगे, उन्हें एक चर्च से दूसरे चर्च भेज दिया जाता था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि डबलिन के चर्च ने इस पूरे मामले में को गुप्त रखने, बदनामी से बचने और चर्च की प्रतिष्ठा को बनाए रखने के अलावा अपनी संपत्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता दी.

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इस पूरे मामले में डबलिन के चर्च ने भरसक ये कोशिश की कि किस तरह से देश के क़ानून को ख़ुद पर लागू किए जाने से बचा जाए.

आलोचना

आयरलैंड की पुलिस और चर्च के मधुर रिश्तों की भी इस रिपोर्ट में निंदा की गई है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस के आला अधिकारियों ने ये माना कि पादरियों पर कार्रवाई उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है और यौन शोषण के आरोपों की जाँच उन्होंने स्वतंत्र रूप से ख़ुद करने की बजाए चर्च के अधिकारियों को ही सौंप दिया.

आयरलैंड के पुलिस कमिश्नर ने पीड़ितों की सुरक्षा नहीं कर पाने पर दुख व्यक्त किया है.

आयरलैंड के न्याय मंत्रालय ने यह रिपोर्ट तैयार की है. न्याय मंत्री दर्मत आहोर्न ने कहा, "ये स्तब्ध कर देने वाले पैमाने पर हुआ स्कैंडल था."

उन्होंने इतना समय बीत जाने के बावजूद न्याय दिलाने का विश्वास दिलाया है.

जांच आयोग ने अपने काम के लिए 46 पादरियों के खिलाफ 320 शिकायतों की जाँच की. इनमें वो 11 पादरी भी शामिल हैं जिन्हें यौन शोषण का दोषी पाया गया था.

यौन शोषण के ये जो मामलें हैं उसमें लड़कियों से दोगुना ज्यादा लड़कों ने यौन शोषण की शिकायत की है.

गुरूवार को जारी हुई ये रिपोर्ट मई में छपी उस रयान रिपोर्ट के बाद आई है जिसमें दो हज़ार लोगों से हुई बातचीत में ये पाया गया था कि उनके साथ यौन शोषण हुआ था.

इस रिपोर्ट ने ये भी पाया था कि चर्च ये बात जानती है कि उसके यहाँ लड़कों का यौन शोषण होता है.