जलवायु परिवर्तन पर कूटनीति तेज

त्रिनिदाद
Image caption गॉर्डन ब्राउन की पहल पर राष्ट्रमंडल के बाहर के नेता भी शामिल होंगे

कोपेनहेगेन बैठक से पहले जलवायु परिवर्तन पर कूटनीतिक और राजनीतिक गहमागहमी तेज हो गई है.

चीन की राजधानी बीजिंग में विकासशील देशों की बैठक हो रही है जिसमें वे आपस में एक राय कायम करने की कोशिश कर रहे हैं.

वहां पहुँचे भारतीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती की चीन की घोषणा के बाद भारत को भी अपनी नीतियों में लचीलापन लाने की ज़रूरत है.

चीन सरकार ने गुरुवार को कार्बन उत्सर्जन में कटौती का लक्ष्य निर्धारित किया था.

इस बीच त्रिनिदाद में राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं का सम्मेलन शुक्रवार से शुरु हो रहा है. इस सम्मेलन में संगठन का ध्यान लगभग पूरी तरह से जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित रहने की संभावना है.

यह सम्मेलन 53 देशों वाले राष्ट्रमंडल संगठन की स्थापना की 60वीं वर्षगांठ पर हो रहा है.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने अमरीका दौरे के बाद त्रिनिदाद में पोर्ट ऑफ़ स्पेन पहुँच गए हैं.

वे त्रिनिदाद में तीन दिन तक होंगे और इस दौरान फ़्रांस, ब्रिटेन और श्रीलंका के नेताओं समेत कई अन्य नेताओं से मिलेंगे.

बाहरी नेता भी शामिल

बीबीसी के कूटनितिक संवनाददाता जेम्स रॉबिन्स का कहना है, "अगले महीने कोपनहेगेन में जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा से पहले ये जलवायु परिवर्तन संबंधित मुद्दों पर सहमति बनाने की दिशा में अभूतपूर्ण प्रयास है. इसके तहत राष्ट्रमंडल से बाहर के देशों के अहम नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है. इन नेताओं में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून, फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी और डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लेक रास्मुसिन शामिल हैं."

बीबीसी संवाददाता जेम्स रॉबिन्स के अनुसार जैसे ही राष्ट्रमंडल सम्मेलन शुरु होता है, वैसे ही पूरा ध्यान केवल जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित हो जाएगा.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने कहा है,"ये सम्मेलन (जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में) केपनहेगेन सम्मेलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा."

गॉर्डन ब्राउन ने ही राष्ट्रमंडल से बाहर के नेताओं को इस बार इस सम्मेलन में आमंत्रित किया है.

पर्यवेक्षकों को अनुसार इस सम्मेलन में भी ग्रीनहाऊस गैसों के उत्सर्जन के लिए ज़िम्मेदार देशों और छोटे विकासशील देशों की बीच की खाई को ख़त्म कर पाना मुश्किल होगा.

संबंधित समाचार