ईरान के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित

ईरान का परमाणु केंद्र
Image caption रूस और चीन ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए ने गुपचुप तरीके से यूरेनियम संवर्धन केंद्र बनाने के लिए ईरान की निंदा की है.

आईएईए ने वियना में हुई बैठक में ईरान के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया और उससे तुरंत इस प्रोजेक्ट को बंद करने की माँग की.

शुक्रवार को पारित हुए प्रस्ताव की ख़ास बात ये रही कि रूस और चीन ने भी इसका समर्थन किया जो परोक्ष तरीके से ईरान के समर्थक माने जाते हैं.

भारत ने भी प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया है.

बीबीसी हिंदी सेवा प्रमुख अमित बरुआ का कहना है, "अमरीका ईरान के उपर दबाव बनाए हुए है. रूस और चीन के साथ मिल कर अमरीका ने ये प्रस्ताव पारित कराया है. 2005 सितंबर में भी भारत ने ईरान के ख़िलाफ़ वोट किया था. मैं समझता हूं कि भारत पश्चिमी देशों के साथ चलना चाहता है. लेकिन इसका असर ईरान-भारत संबंधों पर ज़रूर पड़ेगा."

पिछले चार वर्षों में पहली बार ईरान के ख़िलाफ़ कोई प्रस्ताव आईएईए ने पारित किया है. यह तीन के मुक़ाबले 25 मतों से पारित हुआ जबकि छह सदस्य देशों के प्रतिनिधि मतदान से ग़ैर हाज़िर रहे.

ईरान का कहना रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है जिसका मुख्य मकसद बिजली पैदा करना है लेकिन अमरीका आरोप लगाता रहा है कि ईरान की महत्वाकांक्षा परमाणु हथियार बनाने की है.

सितंबर में ये पता लगा था कि ईरान नतांज में यूरेनियम संवर्धन केंद्र बना रहा है. इससे यूरोपीय देशों की चिंताएँ और बढ़ गईं.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि ये इस बात का प्रतीक है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में अलग-थलग पड़ रहा है.

ईरान ने आईएईए के इस क़दम को ग़ैर ज़रूरी बताया है.

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