क़ानूनी रूप से बाध्यकारी समझौते की मांग

राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं ने जलवायु परिवर्तन पर एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते की मांग की है, जो क़ानूनी रूप से बाध्यकारी हो.

साथ ही इन देशों ने यह भी मांग की कि जिन ग़रीब देशों को जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर कई ज़रूरतें पूरी करनी हैं, उनकी मदद के लिए एक अंतरराष्ट्रीय कोष स्थापित किया जाए.

त्रिनिडाड के पोर्ट ऑफ़ स्पेन शहर में राष्ट्रमंडल देशों के सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन प्रमुख एजेंडा रहा.

इस बैठक में 53 देशों ने हिस्सा लिया. सात दिसंबर से जलवायु परिवर्तन पर कोपेनहेगेन में शुरू हो रही बातचीत से पहले इसे काफ़ी अहम माना जा रहा है.

कोष

राष्ट्रमंडल देशों के नेताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन पर समझौता अगले साल तक स्वीकार हो जाना चाहिए और साथ ही प्रोत्साहित करने के लिए सहायता राशि भी शुरू हो जानी चाहिए.

वर्ष 2012 से यह राशि प्रतिवर्ष 10 अरब डॉलर तक होनी चाहिए. राष्ट्रमंडल देशों ने यह भी मांग की कि कोष का 10 प्रतिशत ऐसे देशों को दिया जाए, जो छोटे द्वीप की शक्ल में हैं या फिर निचले तटीय देश हैं.

बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया है- जलवायु परिवर्तन इस समय सबसे अहम अंतरराष्ट्रीय चुनौती है. हममें से कई देशों के लिए तो यह अस्तित्त्व का सवाल है.

डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोगे रासमूसेन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी इस बैठक में शामिल हुए. उन्होंने उम्मीद जताई कि कोपेनहेगन में शुरू होने वाली बैठक में कोई स्पष्ट समझौता हो जाएगा.

डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने बताया कि कुल 90 देशों ने कोपेनहेगेन में होने वाले सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सहमति दे दी है.

शर्त

शुक्रवार को ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ग़रीब देशों को प्रोत्साहित करने के लिए 10 अरब डॉलर का एक अलग कोष गठित करने की मांग की.

Image caption मनमोहन सिंह ने कोई स्पष्ट लक्ष्य नहीं रखा है

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी इस सम्मेलन में शामिल हुआ. उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर एक अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य के लिए उनका देश तैयार है.

लेकिन उन्होंने किसी तरह के आँकड़े का कोई ज़िक्र नहीं किया. मनमोहन सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समझौता तभी संभव है जब समान रूप से देशों पर भार दिया जाए.

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री केविन रड ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के मामले पर प्रगति हो रही है.

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