महंगाई पर दी सरकार ने सफाई

pranab mukherjee
Image caption प्रणब मुख़र्जी राज्य सभा में आक्रामक मुद्रा में दिखे

शीतकालीन सत्र की संसदीय कार्यवाही के दौरान राज्य सभा में विपक्षी दलों ने महंगाई और बढ़े हुए दामों पर सरकार को जम कर खींचा. सरकार की और से जवाब देते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने माना की गरीबों पर महंगाई की मार सबसे ज्यादा पड़ी है.

संसद में आज राज्यसभा में बवाल उठ गया जब दोपहर के पहले बहस का मुद्दा महंगाई और ज़रुरत की चीज़ों के बढे हुए दाम रहे. सभा की शुरुआत होते ही कांग्रेस के संसद राजीव शुक्ल ने खाद्यानों के बढे हुए दामों और सरकार द्वारा इन्हें काबू में किये जाने वाले प्रयासों को लेखा जोखा माँगा.

सरकार की ओर से सफ़ाई देते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा, "अभी तक हमें ऐसा नहीं लगा है कि मांग की बढ़ती वजह से या फिर मुद्रा के बढ़े हुए कोष और संख्या से ही ऐसा हो रहा है क्योंकि इस बात में कोई शक नहीं है कि वाकई में कुछ कमी देखी जा रही है. पर मुझे यकीन है कि जिस रफ़्तार से हमारी विकास दर में इज़ाफ़ा हो रहा है चीज़ें और भी बेहतर हो जाएँगी."

पर विपक्षी दल के सदस्य प्रणब के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे और भारतीय जनता पार्टी के वेंकैया नायडू ने अपना सवाल पूछते हुए सरकार को इस बात पर कटघरे में लिया कि ज़रुरत की कोई भी चीज़ कम दाम में तो मिल ही नहीं रही. इस पर भी वित्त मंत्री से जवाब यही मिला कि क्योंकि दालों, चीनी और खाद्य तेल में कमी देखी गई है इसीलिए ऐसी स्तिथि आ पहुंची है और सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मज़बूत करने के सारे उपाय कर रही है.

सदन में असल बवाल तब मचा जब सीपीएम की सांसद बृंदा करात ने प्रणब मुखर्जी के जवाब के बीच में ही बोलते हुए पूछा कि चीनी इन दिनों 40 रूपये प्रति किलो बिक रही है और सरकार इसपर आखिर क्या कर रही है.

इसी बात पर प्रणब मुखर्जी बिफर गए और उन्होंने वामदलों के नेताओं से चीख़ कर कहा, "अपना गुस्सा मुझे नहीं, कहीं और जा कर ही दिखाओ."

प्रणब मुखर्जी के भाषण के दौरान सबसे अहम् बात यही रही कि सरकार की और से उन्होंने माना कि सरकार को भी इस बात का एहसास है कि असंगठित ग़रीब लोग महंगाई से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं.

साथ ही साथ उन्होंने इस बात का भी भरोसा दिलाया कि सरकार विभिन्न राज्य सरकारों के लगातार संपर्क में बनी हुई है और राज्य सरकारें भी बढ़ते हुए दामों से निपटने में लगी हैं.

पर इस बात में भी कोई शक नहीं कि वित्त मंत्री के भाषण के दौरान ऐसी कोई ठोस बात भी निकल कर नहीं आई जिससे ये लगे कि सरकार के पास ज़रुरत की चीज़ों के बढ़े दामों को काबू करने की एक निश्चित समय सीमा है.

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