पाक से व्यापक सहयोग: ओबामा

ओबामा
Image caption अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों की संख्या में 30 हज़ार की वृद्धि करेगा

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी नई अफ़ग़ान नीति के तहत पाकिस्तान के बारे में भी काफ़ी वस्तृत चर्चा की है और कहा है कि अमरीका-पाकिस्तान सहयोग को अब बहुत व्यापक बनाया जाएगा.

ग़ौरतलब है कि अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान का ज़िक्र करते हुए ओबामा ने कहा, "मैं मानता हूँ कि अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान में हमारी सुरक्षा दांव पर है. ये क्षेत्र अल क़ायदा के हिंसक चरमपंथ का एपिसेंटर (केंद्र) है. यहीं से हम पर 9/11 का हमला हुआ. जब मैं आप से बात कर रहा हूँ तब वहीं पर नए हमलों की योजना बन रही है. ये कोई काल्पनिक ख़तरा नहीं है."

ग़ौरतलब है कि 'चरमपंथ का एपिसेंटर' शब्दावली सबसे पहले भारत में पाकिस्तान के लिए इस्तेमाल की गई थी.

'चरमपंथी परमाणु हथियारों की खोज में'

उनका कहना था कि पिछले कुछ महीनों में ही देश के भीतर कई चरमपंथी पकड़े गए हैं जो अफ़ग़ानिस्तान-पाकिस्तान की सीमा वाले क्षेत्र से 'आतंकवादी' घटनाओं को अंजाम देने के लिए भेजे गए थे.

उन्होंने बार-बार अल क़ायदा के ख़तरे की बात करते हुए कहा, "अल क़ायदा पर दबाव बनाए रखना ज़रूरी है और उस क्षेत्र में अपने सहयोगियों की स्थिरता और क्षमता बढ़ाने की ज़रूरत है....ये केवल अमरीका का युद्ध नहीं है. अल क़ायदा ने अपने सुरक्षित ठिकानों से लंदन, अम्मान और बाली पर भी हमले किए हैं. अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की सरकारें और लोग दोनों ही को ख़तरा है. परमाणु हथियारों वाले पाकिस्तान में तो और भी बहुत कुछ दांव पर है क्योंकि हमें पता है कि चरमपंथी परमाणु हथियारों की खोज में हैं. हमारा मानना है कि वे इनका इस्तेमाल भी करेंगे."

उनका कहना था कि पूर्व में पाकिस्तान में ऐसे लोग रहे हैं जिन्होंने तर्क दिया है कि 'उग्रवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष उनकी लड़ाई नहीं है और बेहतर यही है कि पाकिस्तान या तो थोड़ा बहुत कुछ कर दे या फिर हिंसक गतिविधियों में लिप्त लोगों से समझौता कर ले.'

ओबामा का कहना था, "हाल के वर्षों में कराची से लेकर इस्लामाबाद तक जब निर्दोष लोग मारे गए हैं तब स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तानी लोगों को ही चरमपंथ से सबसे ज़्यादा ख़तरा है. जनता की भावना बदली है. पाकिस्तान की सेना ने स्वात और दक्षिणी वज़ीरिस्तान में अभियान चलाया है. कोई शक नहीं कि पाकिस्तान और अमरीका का दुश्मन एक ही है. पाकिस्तान से संकीर्ण रिश्ते के दिन ख़त्म हुए. हम पाकिस्तान के साथ ऐसा रिश्ता चाहते हैं जो दोनों देशों के हित में हो...."

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश 'पाकिस्तान की चरमपंथी तत्वों से लड़ने की क्षमता बढ़ाएगा और ये पहले ही स्पष्ट हो चुका है कि पाकिस्तान चरमपंथियों के सुरक्षित अड्डों को बर्दाश्त नहीं करेगा, विशेष तौर पर तब जब उनके इरादे साफ़ हों.'

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए भी मदद दी जाएगी.

संबंधित समाचार