सोने की चमक फीकी पड़ी

सोने की ईंटे

सोने की क़ीमत में तेज़ी से गिरावट आई है. आभूषण विक्रेताओं ने ये सोचकर सोना ख़रीदने से परहेज़ किया कि अभी दामों में संशोधन होगा.

विदेशी बाज़ारों में अब तक सोने को निवेश का एक सुरक्षित माध्यम माना जा रहा था लेकिन अमरीका में बेरोज़ग़ारी घटने के नए आंकड़ों से डॉलर को मज़बूती मिली और सोने की चमक फीकी पड़ने लगी.

विश्व बाज़ार में सोने के दाम 1,226.56 डॉलर प्रति आउंस से गिरकर 1,161.4 पर आ गए जो एक दिन में पांच प्रतिशत की गिरावट रही.

इसके फलस्वरूप भारत में दस ग्राम सोने का दाम 18,000 रुपए से लुढ़कर कर 17,760 रुपए आ गया.

जुलाई के बाद से पहली बार सोने के दाम में भारी गिरावट के संकेत हैं और डॉलर ने निवेशकों को सोना बेचने को प्रेरित किया है.

सोने की क़ीमत में रेकार्ड उछाल

पिछले कुछ सप्ताहों में सोने के दामों में अभूतपूर्व उछाल आया है क्योंकि अमरीका में सूद की दर बहुत ही कम होने के कारण डॉलर कमज़ोर चल रहा था.

विश्व बाज़ार में अमरीकी डॉलर और सोने दोनों को सुरक्षित निवेश माना जाता है लेकिन पिछले कुछ महीनों में अमरीकी डॉलर के कमज़ोर होने के कारण निवेशकों ने सोने में अधिक दिलचस्पी दिखाई.

बृहस्पतिवार को दस ग्राम सोने के दाम 18,550 तक जा पहुंचे थे लेकिन फिर 18,310 पर बंद हुए.

जब अमरीका में बेरोज़गारी के नए आंकड़े प्रकाशित हुए तो डॉलर को मज़बूती मिली. अक्तूबर के महीने में बेरोज़गारी 10.2 प्रतिशत थी लेकिन नवंबर में वो 10 प्रतिशत रह गई.

दिसंबर 2007 में आई मंदी के बाद से पहली बार ऐसा हुआ है. इसका सीधा असर अमरीकी डॉलर पर दिखाई दिया.

लासौल फ़्यूचर्स ग्रूप के मैट ज़ेमैन कहते हैं, "इतने सारे लोगों ने सोने का ढेर लगा लिया है कि डॉलर के चढ़ने से उनमें बड़ी घबराहट है".

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