ओबामा सम्मेलन के आख़िर में जाएँगे कोपेनहेगन

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कोपेनहेगन सम्मेलन में जाने की तारीख़ बदल दी है. व्हाइट हाउस ने घोषणा की है कि अब वे 18 दिसंबर को कोपेनहेगन पहुँचेगे ताकि उस समय मौजूद रह सकें जब सम्मेलन अपने चरम पर होगा.

पहले ओबामा सम्मेलन के शुरुआत में कोपेनहेगन आने वाले थे.

अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक हाल ही में भारत और चीन जैसे देशों ने जो घोषणाएँ की हैं उन्हें देखकर लगता है कि सम्मेलन में कुछ अर्थपूर्ण नतीजा निकलकर सामने आ सकता है.

व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा है कि ओबामा को अब लगता है कि देशों में तमाम मुद्दों को लेकर अब काफ़ी हद तक सहमति है.

इस तरह की अटकलें भी चल रही हैं कि कम विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद करने के लिए दस अरब डॉलर की मदद दी जाएगी.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने ओबामा के नए फ़ैसले का स्वागत किया है और कहा है कि इससे वार्ता को और बल मिलेगा.

उम्मीद की किरण

कुछ दिन पहले अमरीका और चीन ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्य की घोषणा की थी.

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने घोषणा की थी कि अमरीका 2020 तक ग्रीनहाउस गैसों में वर्ष 2005 की तुलना में 17 फ़ीसदी की कटौती करेगा, जबकि चीन ने 40 से 50 फ़ीसदी कटौती का फैसला किया है.

इसके बाद भारत ने भी घोषणा की है कि उत्सर्जन में सकल घरेलू उत्पाद की तुलना में होने वाली वृद्धि की दर 20 से 25 प्रतिशत तक कम की जाएगी. लेकिन भारत ने ये भी कहा है कि उत्सर्जन में कटौती के मुद्दे पर किसी तरह की क़ानूनी बाध्यता स्वीकार नहीं करेगा.

करीब 85 देशों के राष्ट्र अध्यक्ष इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि वो कोपेनहेगन सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इसमें विभिन्न देशों के करीब 15 हज़ार अधिकारी पहुँचेगे.

वहीं कोपेनहेगन सम्मेलन में वार्ता की अगुआई करने वाले वाईडी बोयर ने कहा कि क़ानूनी रूप से बाध्य करने वाले किसी समझौते की उम्मीद अब नहीं कर रहे हैं लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि अर्थपूर्ण प्रगति होगी और किसी राजनीतिक समझौते पर पहुंचा जा सकेगा.

उन्होंने कहा कि हो सकता है कि औद्योगिक देश कार्बन उत्सर्जन और कम करने पर राज़ी हो जाएँ, विकासशील देश उत्सर्जन में वृद्धि की दर कम कर दें और अमीर देश ग़रीब देशों को आर्थिक देने पर राज़ी हो जाएं.

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