कार्बन उत्सर्जन पर जी-20 देशों की स्थिति

कनाडाब्रिटेनजर्मनीरूसफ्रांसइटलीजापानतुर्कीचीनअमरीकासऊदी अरबमैक्सिकोब्राज़ीलभारतदक्षिण अफ़्रीकाअर्जेंटीनादक्षिण अफ़्रीकाइंडोनेशियाऑस्ट्रेलिया
2007 में जी-20 देशों में कार्बन उत्सर्जन (ऊर्जा क्षेत्र से)
देश CO2, दस लाख टन में CO2, प्रति व्यक्ति विश्व रैंकिंग
चीन62844.81
अमरीका600719.92
रूस1,67311.83
भारत14011.24
जापान1,262 9.95
जर्मनी83510.16
कनाडा590187
ब्रिटेन5649.38
दक्षिण अफ़्रीका51610.69
इटली4617.911
ऑस्ट्रेलिया4562212
मैक्सिको4534.213
दक्षिण अफ़्रीका4529.414
सऊदी अरब43415.815
फ्रांस4056.316
ब्राज़ील3982.117
इंडोनेशिया3191.320
तुर्की2773.723
अर्जेंटीना1664.129
स्रोत- ईआईए
कार्बन डायऑक्साइड टन में
कार्बन उत्सर्जन के आधार पर विश्व सूची
देशवार ईआईए सूची
ईआईए डाटा- 1989 से विश्व में उत्सर्जन, देशवार

चीन

वर्ष 2020 तक 2005 के आधार पर प्रति इकाई जीडीपी कार्बन उत्सर्जन में 40 से 45 फ़ीसदी कटौती का लक्ष्य.

वर्ष 2020 तक धनी देशों से 1990 के मुक़ाबले उत्सर्जन में 40 फ़ीसदी कटौती की माँग

हर साल वे जीडीपी का एक फ़ीसदी अन्य देशों को दें.

पश्चिमी देश लो-कार्बन तकनीक दें.

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अमरीका

वर्ष 2020 तक 2005 के मुक़ाबले उत्सर्जन में 17 प्रतिशत कटौती करेगा. लेकिन प्रस्ताव के संसद की मंज़ूरी का इंतज़ार. यह 1990 के स्तर से चार फ़ीसदी कम होगा.

चीन, भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राज़ील से उत्सर्जन कम करने पर ज़ोर.

जलवायु परिवर्तन पर विधेयक सीनेट में लंबित.

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रूस

अनाधिकारिक तौर पर उत्सर्जन में 20 से 25 फ़ीसदी कटौती का संकल्प.

1990 में आर्थिक संकट के कारण 2005 के आधार पर उत्सर्जन एक तिहाई बढ़ने पर भी लक्ष्य हासिल करने में सक्षम.

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भारत

ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने पर सहमत लेकिन बाध्यकारी प्रावधान नहीं मानेगा.

जलवायु परिवर्तन के लिए धनी देश ज़िम्मेदार. इशारा प्रति व्यक्ति उत्सर्जन में बड़े अंतर की ओर.

क्योटो की तरह की संधि का पक्षधर जिसमें बाध्यकारी प्रावधान हों.

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जापान

वर्ष 2020 तक उत्सर्जन में 25 फ़ीसदी कटौती करेगा बशर्ते अन्य देश भी ऐसा ही सोचें.

इसका मतलब दस सालों में 30 फ़ीसदी कटौती जिसका उद्योग जगत विरोध करते हैं.

हातोयामा प्रावधान' से विकासशील देशों को वित्तीय और तकनीकी सहायता.

हर देश की अपनी प्रतिबद्धता का समर्थन करेगा.

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जर्मनी

वर्ष 2020 तक ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन 40 फ़ीसदी कम करने का वादा.

आठ सूत्रीय योजना यूरोपीय संघ के 20 फ़ीसदी कटौती के लक्ष्य से कहीं अधिक.

योजना में आठ प्रस्ताव हैं. बिजली संयंत्रों को उन्नत बनाने से लेकर अक्षय ऊर्जा को बढावा देने का प्रस्ताव.

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कनाडा

दस साल तक टालमटोल करने के बाद वर्ष 2020 तक 2006 की तुलना में 20 फ़ीसदी कटौती की योजना.

इस लक्ष्य की व्यापक आलोचना. इसमें अपर्याप्त माना जा रहा है.

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ब्रिटेन

वर्ष 2008 में जलवायु परिवर्तन क़ानून पास हुआ जिसमें 2050 तक 1990 के स्तर से उत्सर्जन में 80 फ़ीसदी कटौती का लक्ष्य. 2020 तक के लिए 34 फ़ीसदी कटौती का लक्ष्य.

कुछ लोगों का तर्क कि ये लक्ष्य अवास्तविक है और वर्ष सदी के आख़िर से पहले पूरा करना संभव नहीं है.

द इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैकेनिकल इंजीनियर्स के मुताबिक अगर ब्रिटेन ऊर्जा की मांग में 50 फ़ीसदी कटौती कर भी लेता है तो भी लक्ष्य पूरा करने के लिए अगले बीस वर्षों में उसे 16 अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा संयंत्र और 27 हज़ार पनव ऊर्जा टर्बाइन लगाने होंगे.

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दक्षिण कोरिया

2020 तक ग्रीन हाउस गैसों में चार प्रतिशत कटौती का संकल्प. कोपेनहेगेन बैठक विफल होने के बावजूद अमल करेगा.

लेकिन औद्योगिक जगत की चेतावनी कि सरकार ज़्यादा ही तेज़ गति से बढ़ रही है.

ग्रीन टेक्नोलॉजी पर हर साल जीडीपी का दो फ़ीसदी खर्ज करने का संकल्प.

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इटली

उत्सर्जन कटौती के मामले में यूरोपीय संघ में सबसे ख़राब रिकॉर्ड.

वर्ष 2001 से 2006 के बीच जीडीपी की तुलना में उत्सर्जन में काफी वृद्धि.

यूरोपीय आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2007 में उत्सर्जन 55 करोड़ टन के पार जो 1990 से सात प्रतिशत ज़्यादा.

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ऑस्ट्रेलिया

एक विधेयक संसद में विचाराधीन जिसके मुताबिक वर्ष 2020 तक वर्ष 2000 के स्तर से 15 फ़ीसदी कटौती का लक्ष्य.

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मैक्सिको

अपनी तरफ़ से ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 2050 तक 50 फ़ीसदी की कटौती का लक्ष्य.

वैश्विक ग्रीन फंड का समर्थक जिसमें ग़रीब देशों को छोड़ सब पैसा जमा करेंगे और इसका उपयोग ग्रीन टेक्नोलॉजी के लिए होगा.

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दक्षिण अफ़्रीका

विकासशील देशों से इतर उत्सर्जन कटौती का लक्ष्य अपनी इच्छा से तय करने और अक्षय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता का इरादा.

2050 तक 30 फ़ीसदी उत्सर्जन कटौती के पक्ष में.

कोपेनहेगेन बैठक में उसे बाध्यकारी प्रावधान लागू होने की उम्मीद. लेकिन धनी देशों से उम्मीदें अधिक.

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सऊदी अरब

उत्सर्जन कटौती का विरोध करने वाले देश की छवि.

ओपेक के अन्य देशों के साथ जैव इंधन से उत्सर्जन कम करने के बदले वित्तीय मदद की माँग कर रहा है.

कार्बन संचय योजना का पक्षधर.

2007 में ओपेक देशों ने जलवायु परिवर्तन पर शोध के लिए 75 करोड़ डॉलर देने का संकल्प लिया.

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फ़्रांस

नए कार्बन टैक्स की योजना जो अगले साल से लागू होगा.

ये विभिन्न चरणों में लागू होगा और घरों और उद्योगों को इसके दायरे में लाया जाएगा. लेकिन भारी उद्योग और ऊर्जा कंपनियां इसमें शामिल नहीं.

जनता पक्ष में नहीं. ये डर कि उनका कर बोझ और बढ़ेगा.

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ब्राज़ील

चीन और भारत के साथ सुर मिलाते हुए ये मांग करता रहा है कि पहले विकसित देश पहल करें.

हालांकि राष्ट्रपति लुला सिल्वा ने घोषणा की है कि उनका देश 2020 में संभावित उत्सर्जन में 36 फ़ीसदी की कटौती करेगा. ये लक्ष्य जंगलों की कटाई रोक कर पूरा किया जाएगा.

जंगलों की कटाई और क्षरण पर वार्ता में मुख्य देश के तौर पर मांग करता रहा है कि इसकी भरपाई के लिए विकसित देश पैसा दें.

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इंडोनेशिया

2005 के स्तर से कार्बन उत्सर्जन में 26 फ़ीसदी कटौती का लक्ष्य.

जंगलों की कटाई रोक कर और अक्षय ऊर्जा को बढावा देकर लक्ष्य पूरा करने का भरोसा.

नेशनल क्लाइमेट चेंज काउंसिल के मुताबिक उत्सर्जन में 40 फ़ीसदी कटौती के लिए 32 अरब डॉलर की ज़रूरत जिसका अधिकतर हिस्सा विकसित देशों से आएगा.

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तुर्की

फरवरी, 2009 तक क्योटो प्रोटोकॉल पर दस्तख़त नहीं किया.

देर से शामिल होने के कारण क्योटो संधि से मिलने वाली वित्तीय सहायता से वंचित.

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अर्जेंटीना

जी-77 समूह में शामिल.भारी कटौती और ग्रीन टेक्नोलॉजी देने में आनाकानी करने के लिए विकसित देशों की आलोचना करता रहा है.

ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए कोई घरेलू योजना नहीं.

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यूरोपीय संघ

कोपेनहेगेन में अग्रणी भूमिका निभाने की इच्छा.

1990 के स्तर से वर्ष 2020 तक बीस फ़ीसदी उत्सर्जन कम करेगा. अगर अन्य बड़े देश भी मानें तो लक्ष्य 30 प्रतिशत हो सकता है.

2050 तक धनी देश 80 से 95 फ़ीसदी कटौती करें.

ग़रीब देशों से भी उत्सर्जन में कटौती चाहता है.

विकासशील देशों को इस मद में सात से 22 अरब डॉलर देने के लिए तैयार.

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