समलैंगिक बिशप चुनने पर विवाद

  • 6 दिसंबर 2009
बिशप का चुनाव
Image caption छह साल पहले एक और समलैंगिक महिला बिशप चुनी जा चुकी हैं.

अमरीका के लॉस एंजलिस शहर में एक समलैंगिक महिला को एंग्लिकन चर्च का बिशप चुना गया है.

बिशप के लिए चुनी जाने वाली वह दूसरी समलैंगिक महिला हैं. हालांकि इस क़दम से चर्च के भीतर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं.

बॉल्टीमोर की मैरी ग्लासपूल को सहायक बिशप चुना गया है, हालाँकि उनके नाम पर अंतिम मुहर लगाने के लिए अमरीका के एपिस्कोपल चर्चों के प्रमुखों की बहुमत की ज़रूरत होगी.

छह साल पहले जब न्यू हैम्पशायर की समलैंगिक महिला जीन रॉबिनसन को बिशप चुना गया था, तब काफी विवाद हुआ था.

रुढिवादियों का कहना है कि बाइबल स्पष्ट तौर पर समलैंगिकता को ग़लत ठहराती है.

लेकिन उदारवादियों का कहना है कि बाइबल की व्याख्या मौजूदा स्थितियों के आधार पर होनी चाहिए.

Image caption मैरी ग्लासपूल 1988 से अपनी महिला जीवन साथी के साथ रह रही हैं.

ईसाई धर्मगुरुओं के बीच ये मतभेद इतना बढ़ गया कि रुढिवादियों ने अलग चर्च बना कर इसका नाम 'द एंग्लिकन चर्च इन नॉर्थ अमेरिका' रख दिया.

दुनिया भर में एंग्लिकन समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले कैंटरबरी के आर्चकबिशप रोअन विलियम्स पर इस धड़े को स्वीकार करने का दबाव है.

एंगलिकन चर्च में मतभेद

एंगलिकन धर्मसमाज में समलैंगिगता के विषय पर पहले से ही दरार है और यह चुनाव चर्च में चल रहे मतभेदों का एक और सबूत है.

एपिस्कोपल चर्च की नेता बिशप कैथरिन जैफ़र्ट्स स्कोरी का कहना है कि जिस भी बिशप का चुनाव नियमानुकूल होता है वो उसका अभिषेक करेंगी.

मैरी ग्लासपूल 55 वर्ष की हैं और मैरीलैंड धर्मप्रदेश में पिछले आठ सालों से धर्मविधान शास्त्री रही हैं.

वो सन 1988 से अपनी जीवन साथी बैकी सैंडर के साथ रह रही हैं.

मैरी ग्लासपूल ने अपने चुनाव के बाद जारी वक्तव्य में कहा, "ऐसा कोई भी समूह जो अपने जीवन के किसी एक पक्ष को लेकर दमन का शिकार हुआ है वो न्याय और समान अधिकारों के लिए तरसता है".

धर्मसमाज के बिशप जे जॉन ब्रूनो ने स्वीकार किया कि ऐसी अफ़वाहें थीं कि मैरी ग्लासपूल को न चुना जाए लेकिन उन्होने एपिस्कोपल चर्च और बिशप समूह को याद दिलाया कि उन्हे चर्च के धर्मविधानों और हर मानव की मर्यादा का आदर करने के नियम का पालन करना चाहिए.

लेकिन परंपरावादी पादरियों में से एक रैवरेंड कैंडल हारमन ने कहा, "यह निर्णय जीवन की ऐसी शैली को आत्मसात करता है जिसे ईसाइ धर्म ने और दुनिया ने हमेशा ठुकराया है और उसे बाइबल की शिक्षा के विरुद्ध माना है".

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