'जलवायु परिवर्तन पर क़दम उठाने का समय'

कोपेनहेगेन सम्मेलन

डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर महत्वपूर्ण सम्मेलन शुरू हो गया है. संयुक्त राष्ट्र का यह विशेष सम्मेलन डेनमार्क के बच्चों की एक पर्यावरण फ़िल्म के साथ शुरू हुआ.

जलवायु परिवर्तन पर समझौते पर सहमति की कोशिश में कोपेनहेगन में संयुक्त राष्ट्र का एक अहम सम्मेलन शुरू हो गया है.

सम्मेलन का उदघाटन करते हुए डेनमार्क के प्रधानमंत्री लार्स लोके रासमूसेन ने कहा कि दुनिया के सामने यह बहुत बड़ा मौक़ा है और यह मौक़ा हाथ से नहीं निकलना चाहिए.

दुनियाभर से आए 192 प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए रासमूसेन ने कहा कि एक महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी समझौते की आवश्यकता है.

वादा

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की नज़र इस सम्मेलन पर है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि बड़ी संख्या में देशों ने कार्बन में उत्सर्जन में कमी का वादा किया है.

संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन मामलों के प्रमुख यो डे बोअर ने कहा कि अब समय आ गया है कि काम किया जाए.

जबकि संयुक्त राष्ट्र के जलवायु वैज्ञानिक राजेंद्र पचौरी ने कहा कि अगर दुनिया के नेता काम न कर पाएँ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

बीबीसी के पर्यावरण मामलों के संवाददाता का कहना है कि कार्बन उत्सर्जन पर अमरीका, चीन और भारत की घोषणा से समझौते की उम्मीद बनी है.

कुछ विश्लेषक तो इसे दुनिया में अब तक की सबसे अहम बैठक बता रहे हैं.

अगले दो हफ़्तों तक कोपेनहेगन पर दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी. इस दौरान सौ से ज़्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष और लगभग 15 हज़ार प्रतिनिधि जलवायु परिवर्तन की चुनौती पर गहन विचार-विमर्श करेंगे.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा और फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.

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