कोपेनहेगन समझौते के मुख्य बिंदु

  • 19 दिसंबर 2009
विश्व नेता
Image caption समझौते के दस्तावेज़ पर अमरीका समेत भारत, चीन, ब्राज़ील, और दक्षिण अफ्रीका ने सहमति जताई है

अमरीका के नेतृत्व में जलवायु परिवर्तन पर समझौता हो गया है जिसके दस्तावेज़ पर अमरीका समेत भारत, चीन, ब्राज़ील, और दक्षिण अफ्रीका ने सहमति जताई है. उस समझौते में 11 बिंदु हैं, पर इनमें कुछ भी बाध्यकारी नहीं है.

1. इस सहमति पर हस्ताक्षर करने वाले देश जलवायु परिवर्तन की गंभीरता को समझते हैं और पृथ्वी के तापमान में दो डिग्री सेल्सियस से अधिक की बढ़ोतरी नहीं होने देने की दिशा में मिलकर काम करेंगे.

2. ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में बड़े पैमाने पर कटौती की आवश्यकता है, ताकि पृथ्वी के तापमान को बढ़ने से रोका जा सके. लेकिन यह नहीं बताया गया है कि कौन देश कितनी कटौती और कब तक करेगा.

3. जलवायु परिवर्तन की वजह से ग़रीब देशों को जो क्षति उठानी पड़ रही है या जो नुक़सान उन्हें भविष्य में उठाना पड़ सकता है उसे कम करने की तत्काल क़दम उठाने की ज़रूरत है. इसमें छोटे द्वीप देशों और अफ्रीका के ग़रीब देशों का ख़ास तौर पर ज़िक्र किया गया है, लेकिन तत्काल उठाए जाने वाले क़दम क्या होंगे, उनका कोई ज़िक्र नहीं है.

4. सहमत होने वाले देश अपने-अपने देशों में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का हिसाब रखेंगे और एक तय फॉर्मेट के तहत इसकी सूचना देंगे कि उन्होंने कितनी कटौती की है, समझौते में कहा गया है कि गैसों के उत्सर्जन के लक्ष्य का हिसाब किताब गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किया जाएगा.

बाध्यकारी कुछ भी नहीं

Image caption कोपेनहेगन में कोई बाध्यकारी समझौता नहीं होता देख लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया

5. समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे देशों को भी हर संभव सहायता दी जाएगी और उनकी राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा, लेकिन ये भी कहा गया है कि अगर किसी देश को कोई जलवायु परिवर्तन से निबटने के लिए कोई आर्थिक सहायता दी जाएगा तो उसके लिए एक तय प्रक्रिया का पालन किया जाएगा.

6. जंगलों को बचाने और उनकी हालत सुधारने की बात कही गई है.

7. जो देश पहले ही कम ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित करते हैं उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाए ताकि वे कम गैस उत्सर्जन करते हुए अपना विकास कर सकें.

8. जलवायु परिवर्तन से निबटने के आर्थिक पक्ष के बारे में थोड़ी जानकारी दी गई है, इसी में कहा गया है कि वर्ष 2020 तक विकसित देश इस काम के लिए सौ अरब डॉलर के दीर्घकालिक कोष के लिए धन जुटाने की दिशा में मिलकर काम करेंगे. कहा गया है कि ये धन कई स्रोतों से आएगा और इस धन के उपयोग के लिए जो व्यवस्था बनेगी उसमें विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों को बराबर भागीदारी दी जाएगी.

9. इस काम के लिए एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय पैनल गठित किया जाएगा.

10. विकासशील देशों को ग्रीन टेक्नॉलॉजी उपलब्ध कराने के लिए एक व्यवस्था बनाए जाने पर भी सहमति हुई है

11. वर्ष 2015 में इन बिंदुओं पर हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी.

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